नई दिल्ली: हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या यात्रा से पहले पंचांग देखने का विशेष महत्व माना गया है। 11 अगस्त (मंगलवार) का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन है। यह सावन (श्रावण) मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। इस दिन सावन की मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। मंगलवार का दिन होने के कारण भगवान शिव के साथ-साथ उनके ही रुद्रावतार संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का अद्भुत महासंयोग बन रहा है।
पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग, करण और दिन-रात के शुभ-अशुभ मुहूर्तों की सटीक जानकारी मिलती है, जिससे आप अपने दिन के महत्वपूर्ण कार्यों को बिना किसी बाधा के योजनाबद्ध तरीके से पूरा कर सकते हैं। आइए जानते हैं 11 अगस्त का संपूर्ण पंचांग:
तिथि और संवत
सूर्य और चंद्रमा का समय
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सूर्योदय: प्रातः 05:48 बजे
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सूर्यास्त: सायं 07:01 बजे
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चंद्रोदय: प्रातः 05:58 बजे (12 अगस्त)
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चंद्रास्त: सायं 07:45 बजे
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चंद्र राशि: कर्क राशि
नक्षत्र, योग और करण
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नक्षत्र: पुष्य नक्षत्र, तत्पश्चात आश्लेषा नक्षत्र
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योग: वरीयान योग, तत्पश्चात परिघ योग
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करण: शकुनि करण, तत्पश्चात चतुष्पाद करण
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:24 बजे से 05:06 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक
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शिवरात्रि निशिता काल (पूजा का श्रेष्ठ समय): रात्रि 12:05 बजे से 12:48 बजे तक (12 अगस्त)
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:38 बजे से 03:31 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:01 बजे से 07:23 बजे तक
अशुभ समय और राहुकाल (Inauspicious Timings)
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राहुकाल: दोपहर 03:44 बजे से सायं 05:23 बजे तक (इस समय के दौरान नया कार्य या यात्रा शुरू करने से बचें)
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यमगंड: प्रातः 09:06 बजे से 10:45 बजे तक
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गुलिक काल: दोपहर 12:25 बजे से 02:04 बजे तक
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दिशा शूल: उत्तर दिशा (मंगलवार के दिन उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो घर से गुड़ खाकर या शीशा देखकर ही प्रस्थान करें)