बिना टेंडर 11 माह से नगर पालिका में श्रमिकों से करवाया जा रहा सफाई कार्य
दंतेवाड़ा से राजू शर्मा की रिपोर्ट
सफाई ठेकेदार को 28 फीसदी अधिक दर पर किया जा रहा है भुगतान
डीएमएफ फण्ड के रुपए की हो रही बर्बादी
नपा दंतेवाड़ा में नियम कानून को धता बताते किया जा रहा है कार्य
दंतेवाड़ा। नपा दंतेवाड़ा में हाल ही में टेंडर निर्माण कार्य गुपचुप तरीके से अपने चहेते ठेकेदारों को सौंपे जाने का मामला सुर्खियों में छाया रहा। मीडिया में खबर छपने के बाद आनन फानन में टेंडर को निरस्त कर दिया गया था। इस मामले को अभी माह भर भी नहीं बीता होगा कि नगर पालिका परिषद दंतेवाड़ा का एक और कारनामा निकलकर सामने आ गया है। नपा दंतेवाड़ा में नियम कायदों को धता बताते हुए सीएमओ द्वारा सफाई कार्य करवाए जाने के मामले का खुलासा हुआ है। भर्राशाही केवल इतना ही नहीं, सफाई कार्य के लिए जिस फर्म को दो माह का कार्यादेश बीते साल जारी किया गया है उसे 28 परसेंट एबव याने अधिक दर पर कार्य दिया गया है। कार्यादेश की अवधि बीते साल जून 2025 को समाप्त हो चुका है बावजूद अब तक संबंधित फर्म सफाई ठेका का काम कर रहा है और बकायदा उसे अधिक दर पर डीएमएफ की राशि से भुगतान भी किया जा रहा है।
*पूरा मामला इस प्रकार है*
नगर पालिका परिषद दंतेवाड़ा ने नगर की सफाई व्यवस्था के लिए 25 अप्रैल 2025 को मेसर्स कॉल मी सर्विसेस नाम के रायपुर के एक फर्म को 30 श्रमिकों के समूह को केवल 02 माह के समयावधि के लिए कार्य पर रखने का कार्यादेश जारी किया गया था। इस फर्म को 4 लाख रूपए महिना देना तय हुआ था। आज मई 2026 समाप्त हो चुका है अर्थात कार्यादेश अवधि समाप्त हुए करीब 11 माह बीत चुके हैं। नगर पालिका से मालुमात करने पर ज्ञात हुआ कि दो माह बाद सफाई ठेका का कोई टेंडर जारी नहीं किया गया इसका मतलब यह हुआ कि बिना टेंडर के ही बीते 11 माह से काल मी सर्विसेस फर्म रायपुर अवैध रूप से 28 फीसदी अधिक दर पर सफाई के नाम पर भुगतान प्राप्त कर रहा है जो कानुनी रूप से पुरी तरह गलत है। बगैर निविदा निकाले सफाई कार्य का ठेका देना वो भी अधिक दर पर सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। कमीशनखोरी ही मुख्य वजह माना जा सकता है।

हालांकि मुख्य नगर पालिका अधिकारी इसे गलत नहीं मान रहे और उनका तर्क है कि सफाई व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए हमें ज्यादा श्रमिकों की आवश्यकता है इसलिए श्रमिकों से कार्य लिया जा रहा है। सीएमओ का तर्क पूरी तरह से गैर संवैधानिक है क्योंकि शासकीय कार्य किसी की मर्जी से नहीं बल्कि नियम कायदों से चला करता है। बिना टेंडर लाखों रूपए का भुगतान वो भी अधिक दर किया जाना ये स्पष्ट करता है कि इसमें कहीं ना कहीं निहित स्वार्थ छिपा हुआ है। निश्चित तौर पर इसमें कुछ लोगों को कमीशन भी जा रहा होगा इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच किया जाना आवश्यक है।
डीएमएफ राशि की बंदरबांट एवं भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। नगर पालिका में डीएमएफ की राशि में सफाई ठेका के नाम पर हो रहा कथित भ्रष्टाचार भी इसी का एक जीता जागता प्रमाण है।
*व्ही.के.एस.पालदास,सीएमओ, नपा दंतेवाड़ा का कहना है कि मेसर्स कॉल मी सर्विसेस, रायपुर को बीते वर्ष 02 माह का कार्यादेश जारी हुआ था। वर्तमान में बिना टेंडर के उनसे काम लिया जा रहा है। दो बार टेंडर निकाला गया था किन्तु किसी कारणवश टेंडर निरस्त हो गया था। नगर की सफाई को प्राथमिकता क्रम में रखते हुए हमें अतिरिक्त 30 सफाई कर्मियों की आवश्यकता थी इसलिए हमने कार्य आगे बढ़ाया है। इसमें हमारी मंशा बिलकुल भी गलत नहीं थी। मजबुरीवश ठेका आगे बढ़ाया है। जल्द ही हम टेंडर प्रक्रिया को पूरी कर लेंगे।

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