NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: NTA को लगाई फटकार, कहा- UPSC से सीखिए, वहां कभी पेपर लीक नहीं होता
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल उठाया कि तमाम सुरक्षा उपायों, निगरानी समितियों और सुधारों के दावों के बावजूद इतना बड़ा पेपर लीक कैसे हो गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां वर्षों से परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं, लेकिन कभी पेपर लीक जैसी स्थिति सामने नहीं आई। ऐसे में NTA को मजबूत और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली से सीख लेने की जरूरत है।
मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NTA और पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कई तीखे सवाल पूछे और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर जवाब मांगा।
कोर्ट ने डॉ. राधाकृष्णन से पूछा कि जब उनकी समिति ने सुरक्षा सुधारों के लिए विस्तृत सिफारिशें दी थीं, तब ऐसी कौन सी कमी रह गई जिसके चलते पेपर लीक जैसी गंभीर घटना सामने आई। इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने बताया कि समिति ने परीक्षा सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों को लेकर कुल 101 सिफारिशें दी थीं, जिनमें से 60 अल्पकालिक सिफारिशों को वर्तमान परीक्षा चक्र में लागू करने की योजना बनाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश सुझाव लागू किए जा चुके हैं और शेष पर काम जारी है।
सुनवाई के दौरान यह भी स्वीकार किया गया कि पेपर लीक की मुख्य वजह प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में मौजूद कमजोरियां थीं। डॉ. राधाकृष्णन ने अदालत को भरोसा दिलाया कि अब प्रश्नपत्र निर्माण और सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह मजबूत किया जा चुका है तथा आगामी परीक्षाओं में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल सुधारों की घोषणा पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक परीक्षा प्रणाली में ऐसी खामियां बनी रहेंगी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सामूहिक जिम्मेदारी की आड़ में वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों को बचाया नहीं जा सकता। संस्थाओं को यह स्पष्ट करना होगा कि अंतिम जवाबदेही किसके कंधों पर है।
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा तेजी से की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी पुनर्परीक्षा के लिए नया सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय को भी इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि भविष्य में सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षाएं आयोजित करने के लिए स्थायी परीक्षा प्रबंधन प्रणाली और विशेषज्ञ तंत्र कैसे विकसित किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि अस्थायी उपायों की बजाय संस्थागत ढांचा विकसित करना समय की आवश्यकता है।
डॉ. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि समिति की जांच में यह भी सामने आया कि NTA के पास पर्याप्त विषय विशेषज्ञों की कमी थी। इस कमी को दूर करने के लिए अब IIT-JEE, केंद्रीय विद्यालयों और अन्य प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों तथा IIT प्रोफेसरों को परीक्षा प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
मामले की अगली सुनवाई में शिक्षा मंत्रालय से विस्तृत जवाब और परीक्षा सुधारों की दीर्घकालिक रूपरेखा पेश किए जाने की उम्मीद है।

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