गुटखे के बाद गुड़ाखू राज्य का दूसरा सबसे बड़ा दुश्मन
- चंगुल में फंस रहीं हैं महिलाएं
- नारायणपुर में सर्वाधिक तंबाकू प्रेमी
रायपुर (चैनल इंडिया)। तंबाकू की बात आते ही सिगरेट, बीड़ी और गुटखे का नाम सामने आता है लेकिन छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बुजुर्गों के बीच तेजी से फैल रहा सबसे बड़ा खतरा गुड़ाखू है। हाल ही में ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे की टीम ने रायपुर सहित गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम), अंबिकापुर, राजनांदगांव और नारायणपुर में अध्ययन किया। इसमें सामने आया कि दांत साफ करने की पारंपरिक आदत के रूप में इस्तेमाल होने वाला गुड़ाखू अब गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बन चुका है।
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सर्वे में अंबिकापुर से सबसे अधिक 557 लोग शामिल थे, इसी तरह रायपुर जिले से 555, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) से 510 लोग, राजनांदगांव से 485 लोग और नारायणपुर से 459 लोग शामिल हुए। वहीं अगर इन क्षेत्रों में मिले सिर्फ तंबाकू का सेवन करने वाले 811 उपभोक्ताओं की बात करें, तो इनमें गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) से 167, रायपुर से 164 और अंबिकापुर, राजनांदगांव तथा नारायणपुर तीनों जिलों से 160-160 तंबाकू उपभोक्ताओं की पहचान कर उनका विस्तृत साक्षात्कार लिया गया।
छत्तीसगढ़ में 39 प्रतिशत तंबाकू सेवन
गेट्स रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में तंबाकू सेवन का अनुपात देश में सबसे अधिक 39.1 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4 प्रतिशत है। इस सर्वे में राज्य में तंबाकू सेवन की व्यापकता 34.2 प्रतिशत दर्ज की गई। नारायणपुर में सबसे अधिक 34.85 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। इसके बाद जीपीएम (33.72 प्रतिशत), राजनांदगांव (32.98 प्रतिशत), रायपुर (30 प्रतिशत) और
अंबिकापुर (28.72 प्रतिशत) हैं।
करीब 72 प्रतिशत लोगों को तंबाकू के नुकसान की जानकारी है। 76.13 प्रतिशत लोगों ने माना कि इससे कैंसर होता है, जबकि 14.78 प्रतिशत को हृदय रोग और सात प्रतिशत को स्ट्रोक के खतरे की जानकारी है। इसके बावजूद सेवन जारी है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि जानकारी होने के बावजूद 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं और उच्च वर्ग के पुरुषों में गुटखे का सेवन अधिक है। सर्वे के अनुसार राज्य में गुटखा (41.92 प्रतिशत) के बाद गुड़ाखू (41.4 प्रतिशत) दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तंबाकू उत्पाद है। इसका सेवन मुख्य रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और महिलाओं में पाया गया।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अन्य तंबाकू उत्पादों की तुलना में गुड़ाखू छोडऩे की इच्छा सबसे कम देखी गई। जहां 52 प्रतिशत लोगों ने किशोरावस्था (11-20 वर्ष) में तंबाकू सेवन शुरू किया, वहीं गुड़ाखू की शुरुआत अधिकतर लोगों ने 20 वर्ष की उम्र के बाद की। सर्वे में 84 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्होंने कभी तंबाकू छोडऩे की कोशिश नहीं की। केवल 15.9 प्रतिशत लोगों ने इसे छोडऩे का प्रयास किया, जिनमें से आधे से अधिक एक महीने के भीतर फिर सेवन करने लगे। स्वास्थ्य संबंधी चिंता 54.26 प्रतिशत लोगों के लिए तंबाकू छोडऩे का प्रमुख कारण रही।

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