रायपुर में एनआईए अधिकारी बनकर बुजुर्ग महिला को 5 दिनों तक रखा 'डिजिटल अरेस्ट', 7 लाख रुपये ठगे

रायपुर में एनआईए अधिकारी बनकर बुजुर्ग महिला को 5 दिनों तक रखा 'डिजिटल अरेस्ट', 7 लाख रुपये ठगे
रायपुर/छत्तीसगढ़: देश भर में तेजी से पैर पसार रहे 'डिजिटल अरेस्ट' के साइबर फ्रॉड का एक गंभीर मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सामने आया है, जहाँ ठगों ने एक 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसाने का डर दिखाकर पांच दिनों तक लगातार डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा। खुद को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताकर आरोपियों ने कानूनी कार्रवाई का खौफ पैदा किया और विभिन्न बहानों से कुल 7 लाख रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली। इस घटना के सामने आने के बाद से शहर में बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता गहरी हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर के गंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्टेशन रोड के नर्मदापारा में रहने वाली 62 वर्षीय रीता खन्ना की मशीनरी की दुकान है, और उनके दोनों बेटे क्रमशः अमेरिका व देहरादून में रहते हैं। गत 7 अक्टूबर को उनके व्हाट्सएप पर एक अज्ञात वीडियो और ऑडियो कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना परिचय महाराष्ट्र एनआईए के अधिकारी विक्रम सिंह के रूप में दिया। ठग ने महिला पर आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग करके एक फर्जी बैंक खाता खोला गया है, जिसका संबंध मनी लॉन्ड्रिंग और गंभीर अपराधों से है। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें गिरफ्तारी का फर्जी वारंट भेजकर मानसिक रूप से पूरी तरह डरा दिया और अगले पांच दिनों तक उन्हें घर के अंदर ही वीडियो कॉल पर नजरबंद यानी डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा।

शातिर साइबर अपराधियों ने महिला की संपत्ति, बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की पूरी जानकारी हासिल कर ली और गिरफ्तारी से बचने तथा एनओसी (NOC) दिलाने के नाम पर पैसों की मांग शुरू कर दी। चूंकि बीच में बैंक तीन दिन बंद रहे, इसलिए महिला तुरंत पैसे नहीं ट्रांसफर कर सकी, लेकिन ठग लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए उन पर दबाव बनाते रहे। आखिरकार, डर के मारे महिला ने 9 अक्टूबर को केनरा बैंक में अपनी एफडी तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की और 12 अक्टूबर को आरोपियों के निर्देशानुसार एचडीएफसी बैंक के माध्यम से आरटीजीएस फॉर्म भरकर 'महाकाली मेटल' नामक एक संदिग्ध खाते में 7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ठगों ने उनका भरोसा जीतने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नाम से एक फर्जी सर्टिफिकेट भी व्हाट्सएप पर भेज दिया।

घटना का खुलासा तब हुआ जब पैसे ट्रांसफर होने के बावजूद आरोपियों ने उन्हें एनओसी नहीं दी और लगातार टालमटोल करने लगे, जिससे पीड़िता को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। इसके तुरंत बाद उन्होंने गंज थाने पहुंचकर अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है, तथा जिस बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर सेल की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है और जल्द ही इस गिरोह का पर्दाफाश कर लिया जाएगा।