25 वर्षों बाद छत्तीसगढ़ को मिला पहला सरकारी होम्योपैथी कॉलेज, डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्षों बाद प्रदेश में पहले सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत होने जा रही है। नवा रायपुर में खुलने जा रहे इस कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। इस ऐतिहासिक पहल के लिए होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया है।
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश के पहले सरकारी होम्योपैथी कॉलेज को प्रवेश की अनुमति मिल गई है। समाचार में बीएचएमएस पाठ्यक्रम की 63 सीटों पर प्रवेश की जानकारी दी गई है। प्रवेश नीट (NEET) की मेरिट के आधार पर होगा, जिसमें न्यूनतम 15 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटे के लिए निर्धारित होंगी। यह पहल छत्तीसगढ़ में आयुष चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य में होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के लिए सरकारी संस्थान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। राज्य गठन के बाद लगभग 25 वर्षों के इंतजार के पश्चात सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। इससे उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा, जो होम्योपैथी चिकित्सा के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं और प्रदेश में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा आयुष चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को महत्व देना प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम है।
डॉ. त्रिवेदी ने कहा, “होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के विकास के लिए केवल चिकित्सकों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर प्रशिक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। नवा रायपुर में सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह संस्थान छत्तीसगढ़ में होम्योपैथी शिक्षा एवं अनुसंधान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले तीन निजी होम्योपैथी कॉलेज संचालित हुए थे, जिनमें से रायपुर के राजेंद्र नगर स्थित महाराणा प्रताप होम्योपैथी कॉलेज और बिलासपुर का चौकसे होम्योपैथी कॉलेज बंद हो चुके हैं। वर्तमान में रायपुर के रामकुंड स्थित रायपुर होम्योपैथी कॉलेज में 35 सीटें हैं। ऐसे समय में सरकारी कॉलेज की शुरुआत से प्रदेश में होम्योपैथी शिक्षा के अवसरों का विस्तार होने की उम्मीद है।
डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने कहा कि यह उपलब्धि केवल होम्योपैथी चिकित्सा जगत के लिए ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवाओं, चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी उत्साहजनक है। उन्होंने राज्य सरकार से अपेक्षा की कि कॉलेज में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं, योग्य शिक्षक, बेहतर क्लिनिकल प्रशिक्षण एवं शोध की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके।
डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का प्रदेश में पहले सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ में होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के एक नए अध्याय की शुरुआत है।
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