15 अक्टूबर पंचांग: गुरुवार को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और मां कूष्मांडा का पूजन

15 अक्टूबर पंचांग: गुरुवार को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और मां कूष्मांडा का पूजन

नई दिल्ली/रायपुर: सनातन पंचांग और वैदिक ज्योतिष के अनुसार 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना गया है। आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है और शारदीय नवरात्रि का पावन चौथा दिन है, जो माता दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इस दिन विधि-विधान से उनकी उपासना करने से जातकों के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और आरोग्य, यश तथा बल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु को भी समर्पित है, जिनकी आराधना से जीवन में सुख-सौभाग्य और समृद्धि का विस्तार होता है।

पंचांग की गणना के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पूरे दिन और रात प्रभावी रहेगी। आज सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 21 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त सायं 5 बजकर 52 मिनट पर होगा। इस दिन चंद्रमा का गोचर तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा, जिससे जातकों की भावनात्मक स्थिति और निर्णय लेने की क्षमता पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। नक्षत्रों की बात करें तो आज अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके साथ ही सौभाग्य और शोभन योग का अति उत्तम संयोग बन रहा है। यह योग धार्मिक अनुष्ठानों, मांगलिक कार्यों, नए उपक्रमों की शुरुआत और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

दिन के सबसे शुभ और सकारात्मक समय यानी अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो 15 अक्टूबर को यह दोपहर 11 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत, व्यावसायिक समझौतों या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से सफलता की संभावनाएं अत्यधिक बढ़ जाती हैं। वहीं दूसरी ओर, ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ समय माना गया है, जिसमें किसी भी नए या मांगलिक कार्य के शुभारंभ से बचना चाहिए। गुरुवार के दिन राहुकाल दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से 2 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस समयावधि में यात्रा या बड़े वित्तीय लेन-देन को टालना ही समझदारी होती है।