16 अक्टूबर पंचांग: शुक्रवार को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और मां स्कंदमाता का पूजन
नई दिल्ली/रायपुर: सनातन पंचांग और वैदिक ज्योतिष के अनुसार 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना गया है। आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है और शारदीय नवरात्रि का पावन पांचवां दिन है, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता और मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि मां स्कंदमाता की सच्चे मन से आराधना करने से भक्तों को मोक्ष, यश, बल और ज्ञान की प्राप्ति होती है, साथ ही जीवन की सभी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। इसके अलावा शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को भी समर्पित है, जिनकी कृपा से भौतिक सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।
पंचांग की गणना के अनुसार 16 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पूरे दिन और रात प्रभावी रहेगी। आज सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 22 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त सायं 5 बजकर 50 मिनट पर होगा। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में ही विराजमान रहेंगे, जिससे जातकों की मानसिक स्थिति में स्थिरता और गहराई आएगी। नक्षत्रों की बात करें तो आज ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके साथ ही ध्रुव और व्यातिपात योग का सुंदर संयोग बन रहा है। यह योग धार्मिक अनुष्ठानों, जप-तप, दान-पुण्य और महत्वपूर्ण कार्यों की सिद्धि के लिए अत्यंत अनुकूल माना गया है।
दिन के सबसे शुभ और सकारात्मक समय यानी अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो 16 अक्टूबर को यह दोपहर 11 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत, व्यावसायिक समझौतों या मांगलिक अनुष्ठान करना सफलता की संभावनाओं को अत्यधिक बढ़ा देता है। वहीं दूसरी ओर, ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ समय माना गया है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य के शुभारंभ से बचना चाहिए। शुक्रवार के दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 06 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस समयावधि में यात्रा या बड़े वित्तीय लेन-देन को टालना ही समझदारी होती है।
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