गरीबों की थाली से बस्तर की शांति तक, चाऊर वाले बाबा का सपना साकार
छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी में डॉ. रमन सिंह को अजातशत्रु माना जाता है। राज्य बनने के बाद से छत्तीसगढ़ की राजनीति में सक्रिय डॉ. रमन सिंह पहले साल तक मुख्यमंत्री रहे हैं। छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदलने के लिए उन्होंने कई सफल प्रयास किए, जिनमें एक नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ भी था। अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने एसोसिएशन (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) बनाकर इस समस्या पर काबू पाने की कोशिश की। उनके कार्यकाल में सरगुजा समेत छत्तीसगढ़ के कई जिलों से नक्सलियों का सफाया हुआ। सत्ता परिवर्तन होने के कारण भले ही उन्हें सफलता नहीं मिल पाई, परंतु भाजपा के सत्ता में लौटने के बाद अब उनका यह सपना अब साकार होकर हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे की मियाद तय कर दी और अब छत्तीसगढ़ पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुका है।
‘डॉक्टर’ से ‘चाऊर वाले बाबा’ तक का सफर
डॉ. रमन सिंह को ‘मिस्टर क्लीन’, आदर्शवाद से जुड़े जननेता के समर्पणशील नेताओं में शामिल किया जाता है। वे शुरू से ही जनसेवा के कार्यों में सक्रिय रहे। उनकी विशेष रुचि से चिकित्सा जगत पर उनके योगदान का जिक्र किया गया है। उन्होंने जनसेवा में मानव सेवा को प्राथमिकता दी। छत्तीसगढ़ के विकास में उनका योगदान उल्लेखनीय है। उनके कार्यकाल में जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तार हुआ।
छत्तीसगढ़ की राजनीति के अजातशत्रु
गरीबों की सेवा करने वाले डॉक्टर
एक डॉक्टर के रूप में डॉ. रमन सिंह ने हमेशा गरीबों की सेवा की। वर्ष 1975 में उन्होंने बीएमएसएमसी की डिग्री मिली। 23 साल की उम्र में उन्होंने काफी मेडिकल की प्रैक्टिस शुरू कर दी। डॉ. रमन सिंह ने हजारों गरीबों का मुफ्त में इलाज किया। गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए डॉ. रमन सिंह ने ‘भारत माता चिकित्सालय’ का निर्माण कराया। एक समय उन्हें काफी सम्मान मिला।
डॉक्टर के रूप में जाना जाता था। डॉ. रमन सिंह का जन्म 15 अक्टूबर 1952 में एक प्रतिष्ठित किसान परिवार में हुआ। वे छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष हैं। इससे पहले वे लगातार तीन बार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे 2008 से राजनांदगांव और 2004 से 2008 तक राजनांदगांव से छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य भी रहे।
सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री
डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2003 से 2018 तक उन्होंने राज्य का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने विकास, जनकल्याण और सुशासन पर जोर दिया।
राजनीतिक करियर
सिंह भारतीय जनता पार्टी में शुरू से सदस्य के रूप में शामिल हुए थे और 1976-77 में कार्यकर्ता के रूप में काम किया। 1983 में वे कवर्धा नगर पालिका के पार्षद बने। 1989 और 1993 में वे मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। 1998 के आम चुनाव में वह हार गए, लेकिन बाद में फिर चुनाव जीतकर आए।
1999 में वे लोकसभा के लिए चुने गए और 2013 लोकसभा के लिए चुने गए। 1999 से 2003 तक केंद्र में मंत्री रहे। 2003 में छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2008 और 2013 में फिर से मुख्यमंत्री चुने गए। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की।
डॉ. रमन सिंह को छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक महत्वपूर्ण नेता माना जाता है। उन्होंने राज्य के विकास, गरीबों के कल्याण और नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाई।
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