14 अक्टूबर पंचांग: बुधवार को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और मां चंद्रघंटा का पूजन

14 अक्टूबर पंचांग: बुधवार को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और मां चंद्रघंटा का पूजन
नई दिल्ली/रायपुर: सनातन पंचांग और वैदिक ज्योतिष के अनुसार 14 अक्टूबर 2026, बुधवार का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना गया है। आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है और शारदीय नवरात्रि का पावन तीसरा दिन है, जो माता दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से मां दुर्गा की उपासना करने और शुभ मुहूर्तों में अनुष्ठान करने से जातकों के जीवन में साहस, वीरता, आंतरिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश को भी समर्पित है, जिनकी कृपा से सभी प्रकार के विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं।

पंचांग की गणना के अनुसार 14 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पूरे दिन और रात प्रभावी रहेगी। आज सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 20 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त सायं 5 बजकर 53 मिनट पर होगा। इस दिन चंद्रमा का गोचर तुला राशि में ही रहेगा, जो पारस्परिक संबंधों और मानसिक संतुलन के लिए अनुकूल माना गया है। नक्षत्रों की बात करें तो आज विशाखा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके साथ ही ब्रह्म और ऐन्द्र योग का सुंदर संयोग बन रहा है। यह योग धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य, नई शुरुआत और महत्वपूर्ण कार्यों को संपन्न करने के लिए अत्यंत फलदायी और मंगलकारी माना गया है।

दिन के सबसे शुभ और सकारात्मक समय यानी अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो 14 अक्टूबर को यह दोपहर 11 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत, व्यावसायिक समझौते या मांगलिक अनुष्ठान करना सफलता की संभावनाओं को अत्यधिक बढ़ा देता है। वहीं दूसरी ओर, ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य के शुभारंभ से बचना चाहिए। बुधवार के दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 1 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस समयावधि में यात्रा या बड़े निर्णयों को टालना ही समझदारी होती है।

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान अत्यंत खास होता है, जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है। प्रातःकाल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माता के इस स्वरूप को केसर, सफेद या पीले फूल, और दूध से बनी मिठाई का भोग अर्पित करें। इसके बाद 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' मंत्र का जाप करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। बुधवार के दिन गणेश जी की आराधना के साथ हरी मूंग की दाल या हरे वस्त्र का दान करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे बुद्धि, विवेक और व्यापार में अपार सफलता प्राप्त होती है।