ई-वे बिल नियमों में राहत की मांग, कैट ने जीएसटी कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन
एक जिले के भीतर माल परिवहन पर छूट एवं आवश्यक वस्तुओं के लिए सरल नियम लागू करने का आग्रह - अमर पारवानी
रायपुर। देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने छत्तीसगढ़ में व्यापारिक गतिविधियों को और अधिक सरल, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए ई-वे बिल नियमों में व्यावहारिक सुधार किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। कैट का मानना है कि व्यापारियों को अनावश्यक प्रक्रियागत जटिलताओं से राहत देकर तथा कर अनुपालन को सरल बनाकर प्रदेश में व्यापार, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान की जा सकती है।
कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य श्री अमर पारवानी,
ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा व्यापार को प्रोत्साहित करने तथा ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। इसी दिशा में ई-वे बिल व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक और व्यापार-अनुकूल बनाना एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
कैट छत्तीसगढ़ ने सुझाव दिया कि एक ही जिले के भीतर, विशेषकर एक ही शहर अथवा नगर में होने वाले माल के परिवहन के लिए निर्धारित शर्तों के अंतर्गत ई-वे बिल से पूर्ण छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर माल की आपूर्ति करने वाले छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को राहत मिलेगी, दस्तावेजी औपचारिकताओं में कमी आएगी और व्यापारिक कार्यों में तेजी आएगी।
कैट ने यह भी सुझाव दिया कि दवाइयों एवं चिकित्सा उपकरणों, कृषि उपकरणों एवं कृषि निवेश सामग्री, ताजे फल-सब्जियों, दूध एवं दुग्ध उत्पादों, खाद्य पदार्थों, पुस्तकों, नोटबुक एवं शैक्षणिक सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए राज्य के भीतर उपयुक्त एवं न्यूनतम प्रतिबंधों वाली व्यवस्था विकसित की जाए। इससे व्यापारियों को सुविधा मिलने के साथ-साथ आम नागरिकों, किसानों, विद्यार्थियों और अन्य उपभोक्ताओं तक आवश्यक वस्तुओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
श्री अमर पारवानी ने कहा कि व्यापार और शासन एक-दूसरे के पूरक हैं। व्यापारियों को सरल प्रक्रियाएं उपलब्ध कराना और शासन के कर राजस्व एवं अनुपालन संबंधी उद्देश्यों को सुरक्षित रखना, दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। ई-वे बिल व्यवस्था में ऐसे व्यावहारिक सुधार किए जाने चाहिए, जिनसे व्यापारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े और कर व्यवस्था की पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता भी बनी रहे।
उन्होंने कहा कि नियमों का उद्देश्य व्यापार को सुचारू बनाना, कर अनुपालन को प्रोत्साहित करना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना होना चाहिए। यदि स्थानीय परिवहन एवं आवश्यक वस्तुओं के लिए व्यवहारिक राहत प्रदान की जाती है, तो इससे छोटे व्यापारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और प्रदेश के व्यापारिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव आएगा।
कैट ने जीएसटी आयुक्त से आग्रह किया कि व्यापारिक संगठनों के सुझावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए ई-वे बिल नियमों में आवश्यक सुधारों पर विचार किया जाए। कैट ने विश्वास व्यक्त किया कि शासन और व्यापारिक समुदाय के बीच निरंतर संवाद एवं सहयोग से ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जो व्यापारियों के लिए सुविधाजनक, उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी और शासन के लिए राजस्व एवं कर अनुपालन की दृष्टि से प्रभावी हो।
कैट के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन ने कहा कि हमारा उद्देश्य शासन और व्यापारियों के बीच संवाद, सहयोग को मजबूत करना तथा छत्तीसगढ़ को व्यापार एवं उद्योग के लिए और अधिक सुगम, पारदर्शी एवं अनुकूल प्रदेश बनाने की दिशा में रचनात्मक योगदान देना है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन अमर पारवानी, जीवत बजाज, अवनीत सिंह भाटिया, विजय पटेल,राम मंधान,भारत जैन, राकेश ओचवानी, शंकर बजाज श्री दीपक विधानी, कन्हैया गुप्ता, कांति पटेल, श्री रतन सिंह एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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