Big Breaking: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर लगाई 'रोक'

Big Breaking: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर लगाई 'रोक'

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में जारी किए गए नए नियमों (Regulations) को लेकर मचे घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने UGC के 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशन 2026' (Promotion of Equity Regulations 2026) के लागू होने पर तत्काल प्रभाव से रोक (Stay) लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब तलब किया है।

कोर्ट ने क्या कहा? 

गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:

  1. नियम स्पष्ट नहीं हैं: कोर्ट का मानना है कि ये नियम पहली नजर में अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।

  2. समानता के खिलाफ: याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि इसमें भेदभाव की परिभाषा को सीमित कर दिया गया था।

  3. सरकार को निर्देश: कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इन नियमों (Regulations) को दोबारा तैयार (Re-draft) किया जाए। तब तक इनके ऑपरेशन पर पूरी तरह रोक रहेगी।

क्या था विवाद?

UGC ने 23 जनवरी 2026 को "उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने" के लिए नए नियम जारी किए थे।

  • आरोप: इन नियमों में 'जातिगत भेदभाव' की परिभाषा को केवल SC, ST और OBC छात्रों तक सीमित रखा गया था।

  • सामान्य वर्ग की चिंता: याचिकाकर्ताओं (जिनमें विनीत जिंदल और राहुल दीवान शामिल हैं) का कहना था कि इससे सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र भेदभाव और प्रताड़ना के खिलाफ कानूनी सुरक्षा से वंचित रह जाएंगे।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट के इस स्टे (Stay) से फिलहाल ये नियम किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में लागू नहीं होंगे। कोर्ट ने केंद्र और UGC को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है। यह फैसला उन छात्रों और संगठनों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है जिन्होंने इन नियमों को "भेदभावपूर्ण" और "मनमाना" बताया था।


(स्रोत: नवभारत टाइम्स, 29 जनवरी 2026)