सुकमा/बीजापुर (चैनल इंडिया)। बस्तर संभाग में शनिवार को माओवादियों के खिलाफ जवानों ने बड़ा प्रहार किया। बीजापुर और सुकमा के इलाकों में नक्सलियों और जवानों के बीच मुठभेड़ हुई। सुरक्षाबलों की दोनों कार्रवाईयों में बड़ी सफलता हासिल हुई है। बीजापुर में दो नक्सलियों के शव और हथियार मुठभेड़ स्थल से बरामद किए गए हैं। वहीं सुकमा मुठभेड़ में 12 नक्सली ढेर हुए हैं।
सुकमा के किस्टाराम एरिया में नक्सलियों पर डीआरजी जवान कहर बनकर टूटे हैं। सर्च ओपरेशन के दौरान हुई मुठभेड़ में जवानों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए कई नक्सलियों को ढेर किया, जिसमें डीवीसीएम मंगडु के भी मारे जाने की सूचना है। जानकारी के मुताबिक किस्टाराम एरिया में हुई मुठभेड़ में 12 नक्सलियों को ढेर कर दिया गया है। मुठभेड़ स्थल से सभी 12 नक्सलियों के शव के साथ एक 47 और इंसास राइफल बरामद किया गया है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर में शनिवार सुबह से सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है। डीआरजी जवानों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो माओवादियों को मार गिराया है। दोनों के शव बरामद कर लिए गए हैं। दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी हो रही है। इलाके में जवानों का सर्च अभियान जारी है।
जानकारी के मुताबिक बीजापुर जिले के दक्षिण क्षेत्र में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिली, जिसके बाद जवानों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। डीआरजी की टीम दक्षिण बस्तर क्षेत्र में अभियान पर निकली थी। इस दौरान डीआरजी ओर माओवादियों के बीच मुठभेड़ हो गई. सुबह 05 बजे से रुक-रुक कर मुठभेड़ जारी है। इलाके में जवानों का सर्च अभियान जारी है। अब तक मुठभेड़ स्थल से दो माओवादियों के शव बरामद हुए है। बीजापुर एसपी डॉ. जितेन्द्र यादव ने घटना पुष्टि की है।
जीएलए चीफ बाड़से देवा ने हैदराबाद में किया समर्पण
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। माओवादी पार्टी की गुरिल्ला लिबरेशन आर्मी (जीएलए) के चीफ बाड़से देवा ने अपने साथियों के साथ डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष आत्मसमर्पण किया। देवा पर हथियारों की सप्लाई और सैन्य गतिविधियों को संभालने की अहम जिम्मेदारी थी। चीफ बाड़से देवा ने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में अपने कई साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। यह आत्मसमर्पण तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष किया गया। बाड़से देवा माओवादी संगठन के सैन्य ढांचे में एक बेहद अहम पद पर कार्यरत था। हिड़मा और बाड़से देवा सुकमा जिले के पूर्वती गांव के निवासी थे। दोनों माओवादी संगठन के शीर्ष सैन्य नेतृत्व में शामिल माने जाते थे। बाड़से देवा की पहचान एक कुशल रणनीतिकार के रूप में थी, जिसकी भूमिका हथियारों की सप्लाई और गुरिल्ला ऑपरेशनों में बेहद अहम रही है।