अफ्रीका के इन दो देशों ने लगाया "अमेरिकी नागरिकों" पर बैन , कहा- 'अपने देश में अमेरिकियों को घुसने नहीं देंगे'
बमाको/वागादुगु। पश्चिमी अफ्रीकी देशों माली (Mali) और बुर्किना फासो (Burkina Faso) ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में 'जैसे को तैसा' की नीति अपनाते हुए अमेरिकी नागरिकों के अपने देशों में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में इन देशों के नागरिकों पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है।
'पारस्परिकता' का सिद्धांत (Principle of Reciprocity)
दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों द्वारा जारी अलग-अलग बयानों में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय 'पारस्परिकता' और 'संप्रभु समानता' के आधार पर लिया गया है।
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माली का बयान: माली के विदेश मंत्रालय ने कहा, "अमेरिकी प्रशासन द्वारा माली के नागरिकों पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में, अब अमेरिकी नागरिकों पर भी वही शर्तें और आवश्यकताएं लागू होंगी जो मालियान नागरिकों के लिए अमेरिका ने तय की हैं।"
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बुर्किना फासो का रुख: बुर्किना फासो के विदेश मंत्री करमोको जीन-मैरी ट्राओरे ने कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आपसी सम्मान और बराबरी में विश्वास रखता है, इसलिए अमेरिकियों पर तत्काल प्रभाव से वीजा प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन के फैसले से उपजा विवाद
विवाद की शुरुआत 16 दिसंबर, 2025 को हुई थी, जब व्हाइट हाउस ने सुरक्षा कारणों और सूचना साझा करने में कमी का हवाला देते हुए माली, बुर्किना फासो और नाइजर सहित कई देशों को अपनी नई 'ट्रैवल बैन' सूची में शामिल किया था। अमेरिका का यह आदेश 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी हो गया है, जिसके तहत इन देशों के नागरिकों को अप्रवासी और गैर-अप्रवासी वीजा जारी करना पूरी तरह निलंबित कर दिया गया है।
क्षेत्रीय समीकरण और सैन्य शासन
माली और बुर्किना फासो, दोनों ही वर्तमान में सैन्य शासन (Juntas) के अधीन हैं और हाल के वर्षों में इनके संबंध पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और फ्रांस के साथ तनावपूर्ण रहे हैं।
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इन देशों ने नाइजर के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय गठबंधन (AES) बनाया है।
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नाइजर ने भी पिछले सप्ताह इसी तरह के प्रतिबंधों के संकेत दिए थे।
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ये देश अब सुरक्षा और कूटनीति के लिए रूस की ओर झुकाव बढ़ा रहे हैं।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
| देश | कार्रवाई | कारण |
| अमेरिका | माली और बुर्किना फासो के नागरिकों पर प्रतिबंध। | राष्ट्रीय सुरक्षा और अपर्याप्त स्क्रीनिंग का हवाला। |
| माली/बुर्किना फासो | अमेरिकी नागरिकों की एंट्री बैन। | अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में 'जैसे को तैसा' की नीति। |
| प्रभाव | 01 जनवरी 2026 से लागू। | राजनयिक संबंधों में बढ़ता तनाव। |
निष्कर्ष: जानकारों का मानना है कि इस 'वीजा युद्ध' से न केवल पर्यटन और व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि मानवीय सहायता कार्यों में लगे अमेरिकी नागरिकों के लिए भी इन देशों में जाना अब नामुमकिन हो जाएगा।

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