पंचांग 29 जनवरी 2026: आज है मोक्षदायिनी 'जया एकादशी', नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त और राहुकाल
रायपुर/नई दिल्ली। आज तारीख है 29 जनवरी 2026, दिन गुरुवार। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। शास्त्रों में इस एकादशी को 'जया एकादशी' या 'भीष्म एकादशी' के नाम से जाना जाता है।
गुरुवार का दिन और एकादशी का संयोग इसे सोने पे सुहागा बना रहा है। आज के दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करने से जीवन के सभी कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है।
यदि आप आज व्रत रख रहे हैं या कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं, तो यहाँ देखें आज का पंचांग।
आज की तिथि और ग्रह-नक्षत्र (Tithi & Nakshatra)
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तिथि: एकादशी (पूरा दिन और रात)। यह तिथि व्रत रखने के लिए श्रेष्ठ है।
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नक्षत्र: आज मृगशिरा नक्षत्र रहेगा, जो यात्रा और नए कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
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योग: आज ऐन्द्र योग बन रहा है, जो पद-प्रतिष्ठा दिलाने वाला माना जाता है।
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चंद्र राशि: चंद्रमा आज शाम तक वृषभ राशि में रहेंगे और उसके बाद मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।
आज का शुभ-अशुभ समय (Shubh-Ashubh Muhurat)
गुरुवार को 'राहुकाल' दोपहर के समय होता है। इस दौरान पूजा-पाठ या नया निवेश करने से बचना चाहिए।
| विवरण | समय (अनुमानित) |
| सूर्योदय (Sunrise) | सुबह 06:42 बजे |
| सूर्यास्त (Sunset) | शाम 05:41 बजे |
| राहुकाल (Rahu Kaal) | दोपहर 01:34 बजे से 02:56 बजे तक (अशुभ समय) |
| गुलीक काल | सुबह 09:27 बजे से 10:49 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:12 बजे से 12:56 बजे तक (शुभ कार्य के लिए उत्तम) |
| अमृत काल | सुबह 08:15 बजे से 09:48 बजे तक |
(नोट: स्थानीय देशांतर के अनुसार रायपुर और अन्य शहरों के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है)
जया एकादशी का महत्व (Significance)
पद्म पुराण के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को ब्रह्महत्या जैसे पापों से भी मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति कभी भी प्रेत योनि में नहीं जाता और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आज क्या करें, क्या न करें?
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उपाय: आज गुरुवार है, इसलिए भगवान विष्णु को पीले फूल और केले का भोग लगाएं। तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
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दान: चने की दाल, गुड़ और हल्दी का दान करना आज बेहद शुभ माना गया है।
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वर्जित: एकादशी के दिन चावल (Rice) का सेवन पूरी तरह वर्जित है। साथ ही आज तुलसी के पत्ते न तोड़ें (एक दिन पहले तोड़े हुए पत्तों का उपयोग करें)।
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मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का अधिक से अधिक जाप करें।

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