सावधान! स्वाद के चक्कर में कहीं बीमार तो नहीं कर रहा बाजार का अचार? जानें इसके छिपे हुए खतरे और स्वास्थ्य जोखिम
नई दिल्ली। भारतीय थाली में अचार का होना स्वाद को दोगुना कर देता है। पहले के समय में घरों में पारंपरिक तरीके से अचार बनाया जाता था, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद अचार (Store-bought Pickles) पर निर्भर हो गए हैं। हालांकि, स्वाद में लाजवाब लगने वाला यह अचार आपकी सेहत के लिए 'मीठा जहर' साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बाजार के अचार के अत्यधिक सेवन को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।
बाजार का अचार सेहत के लिए क्यों है खतरनाक?
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सोडियम की अत्यधिक मात्रा: अचार को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए कंपनियां इसमें भारी मात्रा में नमक (सोडियम) का उपयोग करती हैं। सोडियम का अधिक सेवन हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा देता है।
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घटिया तेल का इस्तेमाल: घर में हम शुद्ध सरसों या तिल के तेल का उपयोग करते हैं, लेकिन व्यावसायिक स्तर पर लागत कम करने के लिए अक्सर रिफाइंड या हाइड्रोजनेटेड तेलों का इस्तेमाल होता है, जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाते हैं।
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प्रिजर्वेटिव्स और आर्टिफिशियल कलर: बाजार के अचार को आकर्षक दिखाने और सालों तक सुरक्षित रखने के लिए इसमें 'सोडियम बेंजोएट' जैसे प्रिजर्वेटिव्स और कृत्रिम रंगों का प्रयोग किया जाता है। ये रसायन पाचन तंत्र को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ एलर्जी का कारण भी बन सकते हैं।
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एसिडिटी और अल्सर का खतरा: इनमें इस्तेमाल होने वाले तीखे मसाले और विनेगर (सिरका) पेट की परत को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे एसिडिटी, सीने में जलन और लंबे समय में पेट के अल्सर की समस्या हो सकती है।
किडनी और हड्डियों पर बुरा असर
अत्यधिक नमक के सेवन से किडनी पर दबाव बढ़ता है, क्योंकि उसे शरीर से अतिरिक्त सोडियम निकालने के लिए ज्यादा काम करना पड़ता है। इसके अलावा, शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ने से कैल्शियम का क्षय होता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
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सीमित मात्रा: यदि आप बाजार का अचार खाते हैं, तो इसकी मात्रा बहुत कम रखें।
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लेबल जरूर पढ़ें: खरीदने से पहले सामग्री (Ingredients) की जांच करें और देखें कि उसमें नमक और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा कितनी है।
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घर का अचार है बेहतर: सेहत के लिहाज से घर में कम नमक और शुद्ध तेल में बना पारंपरिक अचार ही सबसे सुरक्षित और गुणकारी होता है।

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