मकर संक्रांति में स्नान और दान का बड़ा महत्व,15 जनवरी को करें पुण्य कार्य : इंदुभवानंद महाराज

मकर संक्रांति में स्नान और दान का बड़ा महत्व,15 जनवरी को करें पुण्य कार्य : इंदुभवानंद महाराज

रायपुर। यतिप्रवर दंडी स्वामी इंदुभवानंद तीर्थ महाराज ने मकर संक्रांति को लेकर भ्रम को दूर किया। महाराज जी ने कहा कि कुछ पंचागों के अनुसार दिन में सूर्य संक्रमण हो रहा है और कुछ पंचागों के अनुसार रात्रि में सूर्य संक्रमण हो रहा है। 14 जनवरी को भुवन भास्कर सूर्य नारायण भगवान धनु राशि को छोड़कर मकर राशि मे प्रवेश कर रहे हैं। उनके प्रवेश का समय रात्रि में 9:39 बजे है, सूर्य राशि परिवर्तन कर रहे हैं। अतः मकर संक्रांति का पुण्य कल सूर्य संक्रमण के पश्चात ही होता है। जब रात्रि काल में सूर्य नारायण भगवान मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो पूर्ण काल दूसरे दिन होता है। अतः मकर संक्रांति का जो स्नान व दान का पुण्य है, वह जिस दिन संक्रमण हो रहा है, उस दिन ना हो करके दूसरे दिन हो रहा है। अर्थात 14 जनवरी को ना हो करके 15 जनवरी को ही पुण्य कार्य किया जाएगा।

महाराज जी ने कहा कि 14 जनवरी को दिन में 1:39 बजे  भास्कर भगवान प्रवेश करेंगे। अतः इसका पुण्यकाल दूसरे दिन 15 जनवरी को शाम तक विशेष पुण्य काल रहेगा।

 निर्णय सिंधु के अनुसार भगवान सूर्य नारायण धनु राशि को छोड़कर के सूर्यनारायण भगवान जब मकर में प्रवेश करते हैं तो यदि वह प्रदोष का काल हो या मध्य रात्रि का काल हो तो स्नान व दान दूसरे दिन किया जाता है। क्योंकि शास्त्रों का ऐसा वचन है कि मकर राशि जब सूर्य संक्रमण करते हैं तो सूर्य संक्रमण के बाद पुण्य होता है। कर्क राशि में पहले ही पुण्य काल हो जाता है। तुला राशि और मेष राशि विशुद्ध राशिया मानी जाती है,इसमें पहले और शेष राशि में बाद में पुण्य होता है।

मकर संक्रांति में स्नान अवश्य करें
महाराज जी ने कहा कि मकर संक्रांति में स्नान व दान व्यक्ति को अवश्य करना चाहिए। जो रवि संक्रमण होने पर स्नान नहीं करता है तो सात जन्म तक दरिद्री होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को स्नान करना चाहिए। स्नान करने से दरिद्रता और रोग दूर हो जाता है।

मकर संक्रांति में तिल की गाय और बैल दान करें
महाराज जी ने कहा कि मकर संक्रांति में विशेष दान का बड़ा महत्व है। नया बर्तन का दान करना चाहिए। गोग्रास का अन्नदान करना चाहिए। तिल पात्र देना चाहिए। गुड़ और तिल मिश्रित सामग्री देना चाहिए। सोना दान,भूमि दान, गोदान और वस्त्रदान और सबसे मुख्य दान  माना जाता है कि तिल की गाय बनाकर दान करना चाहिए। जो तिल की गाय बनाकर दान करता है उसकी सभी कामना पूरी हो जाती है और उसको अनंत सुख की प्राप्ति होती है। सूर्य रहस्य में भी लिखा है की वृषभ का दान करना चाहिए। तिल युक्त वृषभ दान करना चाहिए। तिल का वृषभ दान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।

तिल से स्नान करना चाहिए
महाराज जी ने कहा कि तिल के दान का बड़ा महत्व होता है। ऐसे ही आज तिल से स्नान करना चाहिए। तिल का उबटन लगाना चाहिए। तिल का हवन करना चाहिए। जल में तिल डालकर पान करना चाहिए। तिल खाना चाहिए। तिल का दान करना चाहिए। इस प्रकार से 6 प्रकार की तिल पाप नाश करने वाली है। आज के दिन धन का भी दान करना चाहिए। खिचड़ी का भी दान करना चाहिए व खिचड़ी भी खाना चाहिए। 15 जनवरी को दोपहर 1: 39 बजे तक आप विशेष पुण्य प्राप्त करेंगे। और संध्या काल तक सामान्य पुण्य होगा।