क्या हमारी दुनिया की कोई 'परछाई' भी है? वैज्ञानिकों का दावा- ब्रह्मांड में मौजूद है एक 'मिरर यूनिवर्स', जहां समय पीछे की ओर चलता है!

क्या हमारी दुनिया की कोई 'परछाई' भी है? वैज्ञानिकों का दावा- ब्रह्मांड में मौजूद है एक 'मिरर यूनिवर्स', जहां समय पीछे की ओर चलता है!

नई दिल्ली। ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने में जुटे भौतिकविदों (Physicists) ने एक ऐसी थ्योरी पेश की है जो किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी जैसी लगती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बिग बैंग (Big Bang) के समय केवल हमारा ब्रह्मांड ही नहीं बना था, बल्कि इसके साथ एक 'मिरर यूनिवर्स' (Mirror Universe) यानी दर्पण ब्रह्मांड का भी जन्म हुआ था। इस थ्योरी की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दूसरे ब्रह्मांड में समय हमारी तरह आगे नहीं, बल्कि पीछे की ओर (Backward Time) चलता है।

बिग बैंग और 'CPT सिमिट्री' का सिद्धांत

लंबे समय से वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं कि ब्रह्मांड में एंटी-मैटर (Anti-matter) की तुलना में मैटर (Matter) इतना अधिक क्यों है। इस गुत्थी को सुलझाने के लिए भौतिकविदों ने 'CPT सिमिट्री' (Charge, Parity, and Time Symmetry) का सहारा लिया है।

  • सिमिट्री का नियम: भौतिकी का यह बुनियादी नियम कहता है कि प्रकृति में हर चीज़ का एक विपरीत संतुलन होना चाहिए।

  • विपरीत दिशा में विस्तार: थ्योरी के मुताबिक, बिग बैंग के दौरान दो ब्रह्मांड दो विपरीत दिशाओं में फैले। हमारा ब्रह्मांड समय की धारा में आगे बढ़ा, जबकि दूसरा 'मिरर यूनिवर्स' समय में पीछे की ओर चला गया।

कैसा होगा यह मिरर यूनिवर्स?

यदि यह थ्योरी सही साबित होती है, तो मिरर यूनिवर्स की विशेषताएं कुछ इस तरह होंगी:

  1. उल्टा समय: वहां लोग 'भविष्य' से 'अतीत' की ओर यात्रा करेंगे। यानी वहां जन्म के बाद व्यक्ति वृद्ध नहीं होगा, बल्कि युवा होकर अंत में गर्भ में सिमट जाएगा।

  2. विपरीत आवेश (Opposite Charge): हमारे यहाँ के प्रोटॉन वहां नेगेटिव चार्ज वाले होंगे और इलेक्ट्रॉन पॉजिटिव चार्ज वाले।

  3. डार्क मैटर का रहस्य: वैज्ञानिकों का मानना है कि मिरर यूनिवर्स की मौजूदगी उस 'डार्क मैटर' (Dark Matter) की व्याख्या कर सकती है जिसे आज तक कोई देख नहीं पाया है। हो सकता है कि डार्क मैटर इसी दूसरे ब्रह्मांड का प्रभाव हो।

क्या यह केवल कल्पना है?

यह विचार सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन गणितीय रूप से (Mathematically) यह काफी सटीक बैठता है। कनाडा के पेरिमीटर इंस्टीट्यूट फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम पूरे ब्रह्मांड को एक 'पार्टिकल' के रूप में देखें, तो एक 'मिरर इमेज' का होना अनिवार्य है ताकि ब्रह्मांड का कुल संतुलन शून्य बना रहे।

निष्कर्ष:

फिलहाल यह एक परिकल्पना (Hypothesis) है, जिसे साबित करने के लिए और अधिक डेटा और अंतरिक्ष अनुसंधान की आवश्यकता है। अगर भविष्य में इस मिरर यूनिवर्स के प्रमाण मिलते हैं, तो यह इंसान की अंतरिक्ष और समय के प्रति समझ को पूरी तरह बदल देगा।