दुर्ग: विधवा बहू पर ससुराल वालों का कहर; 'टोनही' बताकर घर से निकाला, कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज
दुर्ग (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ एक विधवा महिला को उसके ससुराल वालों ने न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उस पर 'टोनही' (डायन) होने का आरोप लगाकर उसके चरित्र पर भी लांछन लगाया। दो साल तक न्याय के लिए भटकने के बाद, अब न्यायालय के हस्तक्षेप पर महिला थाना भिलाई में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम दनिया (धमधा) निवासी पूनम वर्मा का विवाह 12 मई 2014 को अश्वनी वर्मा से हुआ था। खुशहाल वैवाहिक जीवन के बीच 15 अक्टूबर 2018 को अश्वनी की मृत्यु हो गई। पति की मौत के बाद ही पूनम के लिए ससुराल नरक बन गया।
पीड़िता के गंभीर आरोप:
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अंधविश्वास का सहारा: सास शिवकुमारी, ससुर विजय और देवर सुरेश वर्मा ने पूनम पर जादू-टोना करने और पति की जान लेने का आरोप लगाया। उसे अक्सर 'टोनही' कहकर प्रताड़ित किया जाता था।
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दहेज की मांग: ससुराल पक्ष द्वारा मायके से 5 लाख रुपये लाने का दबाव बनाया गया।
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संपत्ति हड़पने की साजिश: पति के नाम की दो एकड़ कृषि भूमि को देवर के नाम करने के लिए उसे धमकाया गया और मोबाइल फोन छीन लिया गया।
चरित्र हनन और जबरन बेदखली
पीड़िता ने बताया कि उसके चरित्र पर झूठे आरोप लगाए गए और 17 जून 2023 को उसे जबरन कार में बैठाकर मायके छोड़ दिया गया। आरोपियों ने उसकी 8 वर्षीय मासूम बेटी को अपने पास रख लिया और पूनम के गहने, नकदी (1.50 लाख रुपये), आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज हड़प लिए।
न्यायालय से मिला न्याय
पूनम ने दो साल पहले महिला थाने में शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हार मानकर उसने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर 20 अक्टूबर 2023 को उसे अपनी बेटी वापस मिली। अब कोर्ट के कड़े रुख के बाद, धारा 156(3) के तहत भिलाई महिला थाना ने आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 498ए एवं 34 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। यह घटना समाज में आज भी व्याप्त अंधविश्वास और विधवाओं के प्रति संकीर्ण मानसिकता को उजागर करती है।

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