केंद्र सरकार ने अरावली में नई माइनिंग लीज पर लगाई अस्थायी रोक
नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और खनन को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए विवाद पर विराम लगाने की कोशिश की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर अरावली रेंज (दिल्ली से गुजरात तक) में नई माइनिंग लीज देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
मुख्य सचिवों को चिट्ठी: 'अगले आदेश तक नो माइनिंग'
मंत्रालय ने राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर सख्त निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि जब तक भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFIE) द्वारा 'सतत खनन प्रबंधन योजना' (Sustainable Mining Management Plan) और नई गाइडलाइन्स तैयार नहीं हो जातीं, तब तक किसी भी नई खदान को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
फैसले की 4 बड़ी बातें:
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पूर्ण प्रतिबंध: यह रोक केवल कुछ हिस्सों में नहीं, बल्कि पूरी अरावली रेंज में लागू होगी। इसका उद्देश्य अरावली को टुकड़ों में बंटने से रोकना और इसे एक निरंतर भूवैज्ञानिक संरचना (Geological Ridge) के रूप में बचाना है।
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पुरानी खदानों पर सख्ती: जो खदाने पहले से चल रही हैं, उन्हें बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन उनकी निगरानी बेहद सख्त होगी। राज्यों को सुनिश्चित करना होगा कि वे पर्यावरण के नियमों का पूरी तरह पालन करें।
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नये 'नो-गो' जोन: सरकार ने ICFRE को निर्देश दिया है कि वह अरावली में ऐसे नए क्षेत्रों की पहचान करे जहाँ खनन पूरी तरह प्रतिबंधित (No-Go Zone) होना चाहिए।
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विवाद का अंत: हाल ही में '100 मीटर की ऊंचाई' वाली परिभाषा को लेकर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई थी कि इससे अरावली का बड़ा हिस्सा खनन के लिए खुल जाएगा। इस रोक के जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अरावली के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार का पक्ष
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अरावली न केवल एक पहाड़ है, बल्कि यह उत्तर-पश्चिम भारत के लिए एक 'पर्यावरणीय ढाल' है जो रेगिस्तान को बढ़ने से रोकता है। इसलिए, इसके इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) और जैव विविधता को बचाना सरकार की प्राथमिकता है।

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