दुर्ग में 'उल्टी गंगा': बिजली बिल "कम" आने से नाखुश उपभोक्ता पहुंचा कलेक्टर के पास
दुर्ग। आमतौर पर लोग बिजली विभाग के चक्कर तब काटते हैं जब उनका बिल आसमान छूने लगता है या मीटर घोड़े की रफ़्तार से भागता है। लेकिन दुर्ग में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने अधिकारियों का भी माथा ठनका दिया है। यहाँ एक उपभोक्ता अपने 'कम बिजली बिल' और मीटर की 'सुस्त रफ़्तार' से इतना परेशान हो गया कि वह शिकायत लेकर सीधे कलेक्टर के दरबार में जा पहुंचा।
क्या है यह 'अनोखा' मामला? मामला धमधा के तमेरपारा का है। यहाँ एक उपभोक्ता (आर.ओ. चिल्डवॉटर प्लांट संचालक) के यहाँ हाल ही में नया स्मार्ट मीटर लगाया गया। जैसे ही मीटर चालू हुआ, रीडिंग देखकर उपभोक्ता के होश उड़ गए—लेकिन खुशी से नहीं, बल्कि डर से!
उसने बताया कि दिसंबर 2025 से पहले पुराने मीटर में उसकी रोजना की खपत 15 से 20 यूनिट आती थी। लेकिन जैसे ही 'स्मार्ट मीटर' लगा, यह खपत गिरकर मात्र 1 से 4 यूनिट प्रतिदिन रह गई।
10 किलोवाट का लोड और 1 यूनिट खपत? उपभोक्ता की ईमानदारी और डर की वजह भी जायज है। उनके यहाँ कमर्शियल कनेक्शन है और वे एक RO वाटर प्लांट चलाते हैं, जिसका लोड 3 किलोवाट से बढ़ाकर 10 किलोवाट करवाया गया है। इतनी भारी मशीनों के चलने के बावजूद मीटर का रेंगना (1-4 यूनिट बताना) तकनीकी खामी की ओर इशारा कर रहा है।
44 हजार का बिल भरने वाला उपभोक्ता हैरान कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में उपभोक्ता ने बताया कि अक्टूबर और नवंबर में उनका बिल 43 से 44 हजार रुपये के बीच आया था। लेकिन अब मीटर की चाल देखकर उन्हें आशंका है कि या तो स्मार्ट मीटर खराब है या कनेक्शन जोड़ने में कोई बड़ी गलती हुई है।
भविष्य की मुसीबत से बचने की कवायद उपभोक्ता का कहना है कि अगर आज गलती नहीं सुधारी गई, तो कल बिजली विभाग उन पर ही छेड़छाड़ या चोरी का आरोप लगाकर भारी-भरकम पेनल्टी ठोक सकता है। इसलिए उन्होंने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि "साहब, मेरे मीटर की जांच कराओ और इस 'कम खपत' वाली बीमारी को ठीक कराओ।"

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