अहमदाबाद में अब 'फेस रिकग्निशन' से पकड़ी जाएंगी आवारा गायें : नाक का 'फिंगरप्रिंट' बताएगा कौन है मालिक

अहमदाबाद में अब 'फेस रिकग्निशन' से पकड़ी जाएंगी आवारा गायें : नाक का 'फिंगरप्रिंट' बताएगा कौन है मालिक

 गुजरात सरकार का बड़ा AI प्रोजेक्ट

गांधीनगर/अहमदाबाद। गुजरात के शहरों को 'स्मार्ट' बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अहमदाबाद में आवारा पशुओं और उनके कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया जाएगा। गांधीनगर के गिफ्ट सिटी स्थित 'AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो सीसीटीवी कैमरों के जरिए सड़क पर घूमती गाय और उसके मालिक की पहचान पलक झपकते ही कर लेगी।

नाक की बनावट बनेगी गाय की पहचान

इस एआई मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गाय के चेहरे और विशेष रूप से उसकी नाक (Muzzle) को स्कैन करेगा। पशु विज्ञान के अनुसार, हर गाय के नाक की त्वचा का डिजाइन अलग होता है। एआई 'डीप लर्निंग' मॉडल के जरिए इन डिजाइनों को पहचान लेगा। इसके अलावा गाय के शरीर पर मौजूद निशान और आंखों के आकार को भी स्कैन किया जाएगा।

रियल-टाइम ट्रैकिंग और एक्शन

अहमदाबाद मनपा (AMC) के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट अभी पायलट स्टेज पर है। एजेंसी जल्द ही अपना फाइनल मॉडल संचालन समिति के सामने पेश करेगी।

  • कैसे होगा काम?: शहर के चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे गाय की तस्वीर खींचेंगे। एआई सॉफ्टवेयर डेटाबेस में पहले से मौजूद आरएफआईडी (RFID) और माइक्रोचिप डेटा से इस तस्वीर का मिलान करेगा।

  • तुरंत कार्रवाई: जैसे ही गाय की पहचान होगी, सिस्टम स्वचालित रूप से उसके मालिक का नाम, पता और मोबाइल नंबर नगर निगम के कंट्रोल रूम को भेज देगा।

समय और ऊर्जा की बचत

अभी तक मनपा की टीमों को गायों को पकड़ने और उनके टैग स्कैन करने के लिए मौके पर जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय और जोखिम होता था। इस एआई मॉडल के आने से यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल और रियल-टाइम हो जाएगी। गुजरात सरकार का यह मॉडल भविष्य में अन्य महानगरों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।