जेठ में राजधानी के कण्ठ सूखे, इधर पानी की बे-खौफ कालाबाजारी

जेठ में राजधानी के कण्ठ सूखे, इधर पानी की बे-खौफ कालाबाजारी

- एक टैंकर 12 सौ रुपए तक

- जिला व निगम प्रशासन बे-खबर

आकाश धनगर

रायपुर। जेठ के महीने की भीषण गर्मी के चलते भूजल स्रोत काफी नीचे चला गया है, शहर में पीने के पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। हर दिन गली-मोहल्लों में जब पानी का टैंकर आता है तो लूट सी मच जाती है, विवाद की स्थिति बनती है और कईयों को पानी नहीं मिल पाता। कई इलाकों में लो-प्रेशर के चलते पानी कम आ रहा है तो कहीं समय से पहले ही कनेक्शन बंद होने लगे है। ऐसी आपदा के चलते अवसर की तलाश कर रहे पानी सप्लायरों की चांदी हो गई है। 

पानी सप्लाई करने वाले टैंकर धारकों से बातचीत करने पर उन्होंने एक टैंकर पानी की कीमत 1000 से लेकर 1200 रूपए बताई। जबकि, नियमानुसार निगम की फीस 250 से लेकर 600 रूपए तक है। पानी की किल्लत के बीच पब्लिक सप्लाई के नाम पर कॉलोनी और होटल-कॉम्प्लेक्स में पानी बेचा रहा हैं। वहीं, निगम के अधिकारियों का कहना है कि बिना परमिशन के पानी किसी को नहीं दिया जाता, सारी सप्लाई नियमत: चल रही है। प्राइवेट सप्लायर को भी बिना रसीद पानी नहीं दिया जाता है। यह खेल अधिकारियों से सांठगांठ कर लंबे समय से चला आ रहा है। शहर के मोतीबाग, शंकर नगर और सड्डू-कचना इलाके में यह मुनाफाखोरी का व्यापार खूब फल-फूल रहा है। निगम से बिना रसीद लिए ही पब्लिक सप्लाई के नाम पर पानी बेचकर खूब मुनाफाखोरी की जा रही है। 

विवाद की स्थिति 

जोन चार में पानी लेने को लेकर नगर निगम और सप्लायरों के बीच काफी विवाद हुआ। इस बीच ठेकेदार रफीक के ड्राइवरों ने निगम के ट्रैक्टर चालकों को लाइन में लगकर पानी लेने की बात कही। इस बात पर तू-तू, मैं-मैं होने लगी और विवाद उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया। 

बढ़ी पानी की मांग

नगर निगम द्वारा शहर में जल आपूर्ति सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बावजूद इसके, बढ़ती गर्मी के साथ पानी की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। मार्च से ही कई क्षेत्रों में नगर निगम के टैंकर जल आपूर्ति के लिए दौड़ रहे हैं। खासकर उन इलाकों में, जहां पाइपलाइन का पानी कम दबाव के कारण नहीं पहुंच पा रहा, वहां टैंकर के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। अब हालात यह हैं कि हाउसिंग सोसायटियों से भी टैंकर की मांग आने लगी है, जो आने वाले दिनों में निगम के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

बिक रहा है पानी

शहर में जल संकट को लेकर की गई चैनल इंडिया की पड़ताल में सामने आया कि कई वार्ड ऐसे हैं, जहां नलों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है और लोग पूरी तरह टैंकर पर निर्भर हैं। हैरानी की बात यह है कि कई सरकारी कॉलोनियों में भी नियमित जल आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है। इस बीच यह मुनाफाखोरी का यह खेल भी चल रहा है, जिससे पानी की सप्लाई इम्बैलेंस हो चुकी है। 

रफीक के टैंकर वाले से बातचीत के कुछ अंश...

रिपोर्टर - भैया, पानी की समस्या हो रही है, एक टैंकर चाहिए। क्या प्रक्रिया है?

टैंकर चालक - एक टंकी का 1200 रूपए लगेगा, हम लोग आकर खाली कर देंगे। 

रिपोर्टर - घर में कार्यक्रम है, दो-तीन टैंकर लग सकता है।

टैंकर चालक - हां, ठीक है। हम दे देंगे प्रति टैंकर का वही लगेगा। 

रिपोर्टर - पानी बच जाएगा तो वापस हो जाएगा कि नहीं?

टैंकर चालक - नहीं, आपको पूरे टैंकर का पैसा देना पड़ेगा चाहे उपयोग हो या नहीं। 

रिपोर्टर - ठीक है तो पैसा कब देना है, अभी दूं या बाद में?

टैंकर चालक - आप फोन नंबर रख लीजिए, एक दिन पहले बता देना फिर पैसा उस ही दिन दे देना।

कार्रवाई करेंगे

पानी की किल्लत को लेकर नगर निगम में बैठक हुई है, यह गंभीर समस्या है। अगर ऐसा हो रहा तो तत्काल अवगत कराएं, इस पर कार्रवाई की जाएगी। 

मीनल चौबे

महापौर, रायपुर नगर निगम