क्या इंसान भी जी सकेंगे 200 साल? व्हेल पर हुए शोध ने खोले लंबी उम्र के गहरे राज; वैज्ञानिकों के हाथ लगा 'जादुई' प्रोटीन
नई दिल्ली : क्या इंसान की उम्र 200 साल तक बढ़ाई जा सकती है? यह सवाल सदियों से वैज्ञानिकों को मथता रहा है। लेकिन अब, आर्कटिक की बर्फीली लहरों के बीच रहने वाली बोहेड व्हेल (Bowhead Whale) ने इस रहस्य से पर्दा उठाना शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर के वैज्ञानिकों ने व्हेल के शरीर में एक ऐसा खास प्रोटीन खोज निकाला है, जो इंसान को लंबी उम्र और कैंसर मुक्त जीवन देने की क्षमता रखता है।
आइए जानते हैं इस शोध के चौंकाने वाले तथ्य:
1. बोहेड व्हेल: लंबी उम्र का चलता-फिरता चमत्कार
बोहेड व्हेल दुनिया की सबसे लंबी उम्र तक जीने वाली स्तनधारी (Mammal) जीव है।
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दो सदियों का सफर: कुछ व्हेल की उम्र 200 साल से भी अधिक मापी गई है।
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पैटो का विरोधाभास (Peto's Paradox): आमतौर पर बड़े शरीर वाले जीवों में कोशिकाएं (Cells) ज्यादा होती हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ना चाहिए। लेकिन खरबों कोशिकाओं वाली इस व्हेल को शायद ही कभी कैंसर होता है।
2. CIRBP प्रोटीन: डीएनए रिपेयर का 'सुपरहीरो'
वैज्ञानिकों ने पाया कि इस व्हेल की लंबी उम्र के पीछे CIRBP (Cold-Inducible RNA-binding Protein) नाम का एक विशेष प्रोटीन है।
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100 गुना अधिक शक्ति: अन्य स्तनधारियों की तुलना में बोहेड व्हेल में यह प्रोटीन 100 गुना ज्यादा पाया जाता है।
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डीएनए की मरम्मत: यह प्रोटीन शरीर में डीएनए के टूटने (Double-strand breaks) को बहुत बारीकी से ठीक करता है। यही वह क्षति है जो बुढ़ापे और कैंसर का मुख्य कारण बनती है।
3. इंसानी कोशिकाओं पर सफल परीक्षण
शोधकर्ताओं ने जब व्हेल के इस CIRBP प्रोटीन को प्रयोगशाला में इंसानी कोशिकाओं और फलों की मक्खियों (Fruit flies) में डाला, तो नतीजे हैरान करने वाले थे:
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बेहतर मरम्मत: इंसानी कोशिकाओं में डीएनए रिपेयर की क्षमता पहले से काफी बढ़ गई।
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बढ़ गई उम्र: मक्खियों के जीवनकाल में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
4. 'कोल्ड ट्रिक': ठंडे पानी का जादू
यह प्रोटीन 'कोल्ड-इंड्यूसिबल' है, यानी यह ठंडे वातावरण में ज्यादा सक्रिय होता है।
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व्हेल का घर: व्हेल आर्कटिक के ठंडे पानी में रहती है, जिससे उसका CIRBP लेवल हमेशा हाई रहता है।
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इंसानों के लिए संकेत: वैज्ञानिकों का मानना है कि ठंडे पानी से नहाना (Cold Showers) या ठंडे वातावरण में रहना इंसानी शरीर में भी इस प्रोटीन को सक्रिय करने का एक तरीका हो सकता है।
5. क्या है भविष्य की संभावना?
मुख्य शोधकर्ता वेरा गोर्बुनोवा के अनुसार, यह शोध साबित करता है कि इंसानी डीएनए की मरम्मत की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। हालाँकि, यह अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन भविष्य में इसके जरिए ऐसी दवाएं या थैरेपी विकसित की जा सकती हैं जो:
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कैंसर के खतरे को लगभग खत्म कर दें।
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बुढ़ापे की प्रक्रिया को बहुत धीमा कर दें।
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औसत मानवीय उम्र को 100 साल के पार ले जाएं।

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