दुर्ग में 450 सूअरों की मौत, पशुपालन विभाग में मचा बवाल, जाने क्या है इसके पीछे की कहानी...
मुड़पार-नारधा के फार्म में मचा हड़कंप, 1.20 करोड़ का नुकसान
दुर्ग। जिले में अफ्रीकी स्वाइन फीवर ने भयावह रूप ले लिया है। ग्राम मुड़पार-नारधा स्थित एक सूअर फार्म में इस घातक बीमारी से अब तक 450 सूअरों की मौत हो चुकी है, जिससे पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने तत्काल सख्त कदम उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार, फार्म में अचानक सूअरों की तबीयत बिगड़ने और मौत का सिलसिला शुरू हुआ। संदेह के आधार पर सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जहां अफ्रीकी स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई। रिपोर्ट सामने आते ही प्रशासन और पशुपालन विभाग अलर्ट मोड में आ गया।
संक्रमण रोकने ‘किलिंग ऑपरेशन’
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए “किलिंग ऑपरेशन” चलाया गया। इसके तहत करीब 150 जीवित सूअरों को जहरीला इंजेक्शन देकर मारना पड़ा। सभी मृत सूअरों को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत गड्ढों में दफनाया गया, ताकि वायरस का फैलाव रोका जा सके। पूरी कार्रवाई के दौरान डॉक्टरों और कर्मचारियों ने पीपीई किट पहनकर सुरक्षा मानकों का पालन किया।
फार्म सील, आवाजाही पर प्रतिबंध
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित फार्म को पूरी तरह सील कर दिया है। परिसर में किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है और आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
1.20 करोड़ का नुकसान, इंसानों को खतरा नहीं
इस घटना से फार्म संचालक को भारी आर्थिक झटका लगा है। अनुमान के मुताबिक करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये का व्यवसाय पूरी तरह नष्ट हो गया। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार अफ्रीकी स्वाइन फीवर इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है, लेकिन यह सूअरों के लिए अत्यंत घातक और तेजी से फैलने वाली बीमारी है।
प्रोटोकॉल के तहत दफनाए गए शव
पुष्टि के बाद पशुपालन विभाग की टीम ने सभी मृत सूअरों को वैज्ञानिक तरीके और तय प्रोटोकॉल के अनुसार दफनाया। पूरे ऑपरेशन के दौरान उच्च स्तर की सावधानी बरती गई।

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