अंतरिक्ष में सभी ग्रह गोल ही क्यों होते हैं, चौकोर या पिरामिड क्यों नहीं? जानें इसके पीछे का दिलचस्प विज्ञान
विज्ञान डेस्क: अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में अरबों ग्रह और तारे मौजूद हैं। गौर करने वाली बात यह है कि चाहे ग्रह छोटा हो या बड़ा, पथरीला हो या गैसीय, उन सभी का आकार लगभग गोल ही होता है। आखिर ऐसा क्यों है कि ग्रह क्यूब या पिरामिड जैसे किसी अन्य आकार के नहीं होते? इसका मुख्य कारण गुरुत्वाकर्षण (Gravity) है।
गुरुत्वाकर्षण का 'बराबर खिंचाव'
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अनुसार, जब अंतरिक्ष में धूल, गैस और चट्टानों के टुकड़े आपस में टकराते हैं, तो वे धीरे-धीरे एक बड़े पिंड का रूप ले लेते हैं। जैसे-जैसे पिंड का द्रव्यमान (Mass) बढ़ता है, उसका अपना गुरुत्वाकर्षण पैदा होता है।
गुरुत्वाकर्षण बल केंद्र से हर दिशा में समान रूप से काम करता है—ठीक वैसे ही जैसे साइकिल के पहिये की तीलियां केंद्र से किनारों को जोड़ती हैं। यह बल ग्रह के सभी हिस्सों को केंद्र की ओर बराबर खींचता है, जिससे वह एक गेंद जैसा गोल आकार ले लेता है। यदि कोई हिस्सा बाहर निकला हुआ होता है, तो गुरुत्वाकर्षण उसे अंदर की ओर खींचकर सतह को बराबर कर देता है।
क्या सभी ग्रह 'परफेक्ट' गोल हैं?
हैरानी की बात यह है कि सौर मंडल के सभी ग्रह पूरी तरह से गोल नहीं हैं। कुछ ग्रह अपनी धुरी पर बहुत तेजी से घूमते हैं, जिससे उनके आकार में थोड़ा बदलाव आ जाता है:
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बुध और शुक्र: ये ग्रह बहुत धीमी गति से घूमते हैं, इसलिए ये लगभग कंचे की तरह एकदम गोल नजर आते हैं।
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बृहस्पति और शनि: ये विशाल गैसीय ग्रह अपनी धुरी पर बहुत तेज गति से चक्कर लगाते हैं। इस घूर्णन (Rotation) के कारण इनकी भूमध्य रेखा (Equator) वाला हिस्सा थोड़ा बाहर की ओर उभर जाता है, जिसे 'इक्वेटोरियल बल्ज' कहा जाता है।
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शनि सबसे ज्यादा चपटा है; इसकी भूमध्य रेखा ध्रुवों की तुलना में 10.7% अधिक चौड़ी है।
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बृहस्पति में यह उभार 6.9% है।
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पृथ्वी और मंगल: ये ग्रह भी धीरे घूमते हैं, इसलिए इनमें उभार बहुत कम है। पृथ्वी अपनी भूमध्य रेखा पर सिर्फ 0.3% अधिक चौड़ी है।

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