अंतरिक्ष में कैसे काम करता है 'स्पेस टॉयलेट'? ओरियन सिस्टम के बारे में ये बातें कर देंगी आपको हैरान

अंतरिक्ष में कैसे काम करता है 'स्पेस टॉयलेट'? ओरियन सिस्टम के बारे में ये बातें कर देंगी आपको हैरान

नई दिल्ली : अंतरिक्ष यात्रियों के लिए शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) में दैनिक क्रियाएं करना सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में से एक है। नासा के आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन के लिए ओरियन स्पेसक्राफ्ट में एक अत्याधुनिक शौचालय प्रणाली लगाई गई है, जिसे यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (UWMS) कहा जाता है। यह न केवल तकनीक का नमूना है, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों की निजता का भी ध्यान रखता है।

आइए जानते हैं स्पेस टॉयलेट से जुड़े कुछ अनोखे और रोचक तथ्य:

1. बिना गुरुत्वाकर्षण के कैसे काम करता है टॉयलेट?

पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण कचरे को नीचे खींचता है, लेकिन अंतरिक्ष में सब कुछ तैरता रहता है।

  • वैक्यूम तकनीक: ओरियन का टॉयलेट एक शक्तिशाली वैक्यूम सिस्टम (Suction) का उपयोग करता है। यह हवा के प्रवाह (Airflow) के जरिए कचरे को शरीर से दूर खींचकर स्टोरेज टैंक में ले जाता है।

  • अलग-अलग सेक्शन: पेशाब के लिए एक पाइप (Hose) और मल त्याग के लिए एक छोटा छेद वाला सीट होता है। दुर्गंध को रोकने के लिए हवा को फिल्टर किया जाता है।

2. ओरियन सिस्टम: पहली बार मिली 'निजता'

अपोलो मिशन के दौर में अंतरिक्ष यात्रियों को प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल करना पड़ता था, लेकिन ओरियन में हालात बदल गए हैं:

  • दरवाजे वाला टॉयलेट: ओरियन कैप्सूल में पहली बार एक ऐसा टॉयलेट दिया गया है जिसमें दरवाजा है। अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हेन्सन के अनुसार, यह पूरे मिशन के दौरान अकेला महसूस करने वाली एकमात्र जगह है।

  • शोर का स्तर: यह सिस्टम काफी शोर करता है। सुरक्षा के लिहाज से अंतरिक्ष यात्रियों को इसका उपयोग करते समय कान की सुरक्षा (Hearing Protection) पहननी पड़ती है।

3. कचरे का क्या होता है?

ओरियन मिशन छोटा (लगभग 10 दिन) होने के कारण इसमें ISS की तरह रीसाइक्लिंग नहीं की जाती:

  • मूत्र का निपटान: पेशाब को प्रोसेस करने के बजाय इसे नियमित रूप से अंतरिक्ष में 'वेंट' (बाहर निकाल) कर दिया जाता है। अंतरिक्ष के शून्य तापमान में यह तुरंत जम जाता है और चमकते हुए कणों की तरह दिखता है।

  • ठोस कचरा: ठोस कचरे को सीलबंद बैगों में संकुचित (Compress) करके कंटेनर में रखा जाता है, जिसे पृथ्वी पर वापस लाया जाता है।

4. चुनौतियां और हालिया 'ग्लिच'

रिपोर्ट के अनुसार, आर्टेमिस II मिशन के दौरान ओरियन के टॉयलेट में कुछ तकनीकी खामियां भी देखी गईं:

  • जम गई पाइप: अंतरिक्ष की अत्यधिक ठंड के कारण पेशाब निकालने वाली पाइप कभी-कभी जाम हो जाती है। इसे ठीक करने के लिए अंतरिक्ष यान को सूरज की रोशनी की तरफ घुमाया जाता है ताकि पाइप पिघल सके।

  • हवा का बहाव: यदि बिजली या पंखे में कोई खराबी आती है, तो 'एयरफ्लो' रुक सकता है, जिससे टॉयलेट का उपयोग करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय के लिए यात्रियों के पास बैकअप के रूप में 'पेशाब के बैग' (Urinal Bags) होते हैं।

5. क्यों जरूरी है सटीक डिजाइन?

अंतरिक्ष में 'मिसफायर' (कचरे का बाहर गिरना) न केवल गंदगी फैलाता है, बल्कि यह संवेदनशील उपकरणों और अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए, ओरियन के टॉयलेट को पुरुषों और महिलाओं दोनों के उपयोग के लिए बेहद सावधानी से डिजाइन किया गया है।