"गजब की वैकेंसी! लंगूर की आवाज निकालो और पाओ सरकारी नौकरी"

"गजब की वैकेंसी! लंगूर की आवाज निकालो और पाओ सरकारी नौकरी"

नई दिल्ली। लोकतंत्र के मंदिर, दिल्ली विधानसभा में इन दिनों एक अजीबोगरीब 'दुश्मन' ने सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगा दी है। ये दुश्मन कोई और नहीं, बल्कि बंदरों के वे हुड़दंगी झुंड हैं जिन्होंने विधायकों के एंटीना से लेकर परिसर की शांति तक को भंग कर दिया है। इस 'वानर सेना' से निपटने के लिए विधानसभा प्रशासन ने अब तक का सबसे अनोखा और मानवीय तरीका निकाला है - 'मानव लंगूरों' की भर्ती!

लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसके लिए बाकायदा ₹17.5 लाख का टेंडर जारी किया है।

क्यों पड़ी इस 'अनोखी नौकरी' की जरूरत?

विधानसभा परिसर में बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि वे केवल सामान ही नहीं तोड़ रहे, बल्कि सदन की कार्यवाही में भी खलल डाल चुके हैं।

  • एंटीना और तारों पर कब्जा: बंदरों के झुंड डिश एंटीना मोड़ देते हैं और इंटरनेट के तारों को चबा जाते हैं, जिससे कामकाज ठप हो जाता है।

  • विफल रहे पुतले: पहले प्रशासन ने लंगूरों के कटआउट (पुतले) लगवाए थे, लेकिन बंदर अब इतने स्मार्ट हो गए हैं कि वे डरने के बजाय उन्हीं पुतलों के ऊपर बैठकर आराम फरमाते हैं।

  • असली लंगूरों पर बैन: भारत में असली लंगूरों का व्यावसायिक इस्तेमाल प्रतिबंधित है, इसलिए अब 'लंगूर की आवाज' की नकल करने वाले एक्सपर्ट्स ही एकमात्र सहारा बचे हैं।

क्या होगी 'इंसानी लंगूर' की जिम्मेदारी?

अगर आप लंगूर की तरह 'खि-खि' और डरावनी आवाजें निकाल सकते हैं, तो विधानसभा आपके लिए रेड कार्पेट बिछाने को तैयार है।

  1. 8 घंटे की ड्यूटी: चयनित कर्मियों को 8 घंटे की शिफ्ट में परिसर के संवेदनशील कोनों में तैनात रहना होगा।

  2. असली लंगूर जैसा अहसास: ये एक्सपर्ट्स न केवल आवाज निकालेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर लंगूरों की तरह व्यवहार कर बंदरों को डराएंगे।

  3. सुरक्षा और बीमा: काम थोड़ा जोखिम भरा है, इसलिए सरकार इन कर्मियों को बीमा कवरेज (Insurance) भी दे रही है।

ऐतिहासिक किस्सा: जब सदन में घुस गया 'फिल्मी मेहमान'

बंदरों का यह खौफ नया नहीं है। साल 2017 में एक बंदर तो सीधे विधानसभा सदन के भीतर घुस आया था। उस वक्त सरकारी स्कूलों के गेस्ट टीचर्स पर चर्चा चल रही थी, जिसे इस 'घुसपैठिए' ने बीच में ही रुकवा दिया था। तत्कालीन स्पीकर को भी विधायकों की सुरक्षा के लिए चिंता जतानी पड़ी थी।