AI के युग में UPSC की तैयारी 'समय की बर्बादी'? पीएम मोदी के सलाहकार संजीव सान्याल के बयान ने छेड़ी नई बहस

AI के युग में UPSC की तैयारी 'समय की बर्बादी'? पीएम मोदी के सलाहकार संजीव सान्याल के बयान ने छेड़ी नई बहस

नई दिल्ली। भारत में जहाँ हर साल लाखों युवा अपनी आँखों में 'कलेक्टर' बनने का सपना लिए दिल्ली के मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर की गलियों में साल गुजार देते हैं, वहीं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PM-EAC) के सदस्य संजीव सान्याल ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने देश के 'कोचिंग हब' से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल मचा दी है।

संजीव सान्याल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में केवल नौकरी की सुरक्षा (Job Security) के लिए UPSC की सालों-साल तैयारी करना "समय की पूरी तरह से बर्बादी" है।

"लाखों युवाओं की ऊर्जा हो रही है व्यर्थ"

एक विशेष साक्षात्कार में सान्याल ने तर्क दिया कि UPSC परीक्षा की सफलता दर महज 0.1% से भी कम है। उन्होंने कहा, "लाखों युवा अपने जीवन के सबसे रचनात्मक और ऊर्जावान साल (20 से 30 वर्ष की आयु) एक ऐसी परीक्षा के पीछे लगा रहे हैं जहाँ चयन की संभावना न के बराबर है। यह न केवल उन युवाओं के करियर के लिए जोखिम भरा है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा नुकसान है।"

उन्होंने आगे जोड़ा कि 1960 के दशक में नौकरशाही में जाना एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन 2025 के भारत में युवाओं को एलन मस्क या मुकेश अंबानी बनने का सपना देखना चाहिए, न कि केवल एक 'सरकारी बाबू' बनने तक सीमित रहना चाहिए।

पारंपरिक डिग्री और कॉलेजों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'

सान्याल ने केवल UPSC ही नहीं, बल्कि हमारी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार:

  • डिग्री की अहमियत कम होगी: आने वाले समय में केवल कॉलेज की डिग्री हाथ में होने से नौकरी नहीं मिलेगी। पारंपरिक लेक्चर और पुरानी किताबों पर आधारित पढ़ाई अब अपनी प्रासंगिकता खो रही है।

  • प्रोफेसर बनाम AI: सान्याल का मानना है कि AI अब पारंपरिक प्रोफेसरों की तुलना में कहीं अधिक 'अपडेटेड' और 'स्पेशलाइज्ड' ज्ञान देने में सक्षम है।

  • सीखो और कमाओ (Learn while you earn): उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं को 18 साल की उम्र से ही काम (Apprenticeships) शुरू कर देना चाहिए और कॉलेज की पढ़ाई को उसके साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों से पूरा करना चाहिए।

भविष्य की जरूरत: स्किल डेवलपमेंट

संजीव सान्याल के मुताबिक, आने वाले समय में "डिग्री से ज्यादा स्किल" की कीमत होगी। जो युवा AI का उपयोग करना जानते हैं और नई तकनीक के साथ खुद को ढाल सकते हैं, वही सफल होंगे। उन्होंने संस्थानों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे अपने पढ़ाने के तरीके को AI के अनुरूप नहीं बदलते हैं, तो वे जल्द ही इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।

सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

सान्याल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो गुट बन गए हैं। एक वर्ग का कहना है कि वे कड़वा सच बोल रहे हैं और युवाओं को 'UPSC के जाल' से बाहर निकलकर स्टार्टअप और तकनीक की ओर बढ़ना चाहिए। वहीं, दूसरा वर्ग मानता है कि देश को चलाने के लिए योग्य प्रशासकों की जरूरत हमेशा रहेगी और इस परीक्षा को 'समय की बर्बादी' कहना गलत है।