छत्तीसगढ़ में 'गार्ड ऑफ ऑनर' की परंपरा खत्म: मंत्री और पुलिस अफसरों को अब नहीं मिलेगी सलामी

छत्तीसगढ़ में 'गार्ड ऑफ ऑनर' की परंपरा खत्म: मंत्री और पुलिस अफसरों को अब नहीं मिलेगी सलामी

गृह विभाग ने जारी किया ऐतिहासिक आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में वीआईपी कल्चर और औपनिवेशिक मानसिकता को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य के भीतर सामान्य दौरों और निरीक्षण के दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को 'गार्ड ऑफ ऑनर' (सलामी) नहीं दिया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा की पहल पर राज्य के गृह विभाग ने गार्ड ऑफ ऑनर के नियमों में संशोधन का आदेश जारी कर दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

अब किसे नहीं मिलेगी सलामी?

नए आदेश के अनुसार, राज्य के भीतर:

  • गृहमंत्री सहित सभी मंत्रीगण

  • पुलिस महानिदेशक (DGP)

  • अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी

जब ये लोग सामान्य दौरों, आगमन-प्रस्थान या निरीक्षण (Inspection) पर जाएंगे, तो उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का मानना है कि यह अंग्रेजों के जमाने (औपनिवेशिक काल) की परंपरा थी, जो आज के समय में अनावश्यक औपचारिकता मात्र है। इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल के समय और ऊर्जा को बचाना है, ताकि उनका उपयोग कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और जनसेवा के कार्यों में किया जा सके।

इन मौकों पर जारी रहेगी परंपरा:

हालाँकि, यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय महत्व के अवसरों और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए यह प्रोटोकॉल जारी रहेगा।

  • संवैधानिक पद: राष्ट्रपति, राज्यपाल और अन्य विशिष्ट अतिथियों के लिए प्रोटोकॉल के अनुसार सलामी गारद की व्यवस्था पहले की तरह ही रहेगी।

  • विशेष अवसर: गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), पुलिस स्मृति दिवस (21 अक्टूबर), राष्ट्रीय एकता दिवस और पुलिस दीक्षांत परेड जैसे राजकीय समारोहों में गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा बरकरार रहेगी।

गृह विभाग ने इसे पुलिस को 'अनावश्यक औपचारिकताओं' से मुक्त कर 'आधुनिक पुलिसिंग' की ओर एक बड़ा कदम बताया है।