बस्तर का लोहा अब जाएगा आंध्रप्रदेश
किरंदुल से अनकापल्ली तक बिछाई जाएगी स्लरी पाइप लाइन
रायपुर/ जगदलपुर (चैनल इंडिया)। नक्सल मुक्त होने की आहट के बीच बस्तर के जल, जंगल और जमीन पर में मल्टीनेशनल कम्पनी की एण्ट्री होने लगी है। नक्सलियों के खौफ से मुक्त होकर इस तरह की मल्टीनेशनल कम्पनीज अब बस्तर को अपना ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील से हो गई है जिसे भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय ने देश के सबसे बड़े स्टील प्लांट के लिए किरंदुल से अनकापल्ली तक स्लरी पाइपलाइन बिछाने की मंज़ूरी दे दी है। भारत सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने इसे विनाशकारी बताते हुए कहा है कि इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
इस्पात मंत्रालय ने कदम परियोजना को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ) से पर्यावरणीय मंज़ूरी मिलने के बाद उठाया गया है। वहीं दूसरी तरफ केके लाइन के होने के बावजूद भी यह ढुलाई रेलवे नहीं कर सकेगा और भारतीय रेल को इस परियोजना से हर साल सत्रह सौ पचास करोड़ अर्थात साढ़े सत्रह अरब रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ेगा। किरंदुल से कोत्तवलसा तक रेल मार्ग के दोहरी करण में रेलवे के 7200 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं जिसकी भरपाई सिर्फ पांच सालों के आर्सेलर मित्तल के लौह अयस्क की ढुलाई से ही की जा सकती है मुनाफे की लालच में बस्तर की एक मात्र बारह मासी शबरी नदी के अस्तित्व को भी दांव पर लगा दिया गया है।
आंध्रप्रदेश के अनकापल्ले में आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील के देश के सबसे बड़े स्टील प्लांट के लिए किरंदुल से अनकापाल्ली तक स्लरी पाइपलाइन बिछाने की मंज़ूरी पेट्रोलियम एवं खनिज पाइप लाइन (भूमि उपयोग अधिकार अधिग्रहण) अधिनियम 1962 के तहत दी गई है। यह कानून छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा सुकमा से ओडिशा के मलकानगिरी होते हुए अनकापल्ले संयंत्र तक लौह अयस्क घोल पहुँचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने का अधिकार प्रदान करता है ।
तीन राज्यों से गुजऱेगी स्लरी पाइप लाइन
मंत्रालय ने अनुमतियों और भूमि संबंधी प्रक्रियाओं के प्रबंधन हेतु पाइपलाइन मार्ग के प्रत्येक क्षेत्र के लिए विशिष्ट प्राधिकरण नियुक्त किए हैं। एक राजपत्र अधिसूचना द्वारा दंतेवाड़ा और सुकमा (छत्तीसगढ़), मलकानगिरी (ओडिशा) और विशाखापत्तनम, अनकापल्ली और अल्लूरी सीताराम राजू (आंध्रप्रदेश) जिलों के राजस्व अधिकारियों को परियोजना की देखरेख के लिए अधिकृत किया गया है। इसके बाद, अगले चरणों में भूमि अधिग्रहण अधिसूचना, भूमि सर्वेक्षण, जनपरामर्श और औपचारिक सरकारी सिफारिशें शामिल हैं। ये प्रशासनिक प्रक्रियाएँ सुचारू कार्यान्वयन और पर्यावरणीय मानदंडों का पालन सुनिश्चित करेंगी।
व्यापक विरोध करेंगे: विक्रम मंडावी
भारत सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि यह परियोजना आंध्रप्रदेश के लिए जितनी लाभकारी है, उतनी ही बस्तर के लिए विनाशकारी है। जल, जंगल और जमीन के लिए यह परियोजना अभिशाप साबित होगी इसका व्यापक विरोध किया जायेगा।