अमरूद' ने फँसाया सिपाही! कमांडेंट आवास से फल तोड़कर खाने पर थमाया नोटिस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) मुख्यालय में इन दिनों किसी रेस्क्यू ऑपरेशन की नहीं, बल्कि एक 'अमरूद' की चर्चा है। अनुशासन के लिए मशहूर इस बल के एक सिपाही को महज इसलिए कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया गया क्योंकि उसने ड्यूटी के दौरान कमांडेंट आवास परिसर में लगे पेड़ से फल तोड़कर खा लिया था। हालांकि, सिपाही द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण ने अब इस मामले को एक मानवीय मोड़ दे दिया है।
क्या है पूरा 'अमरूद कांड'?
मामला जनवरी के पहले सप्ताह का है। लखनऊ स्थित SDRF की पहली बटालियन के मुख्यालय में एक सिपाही की तैनाती कमांडेंट के आधिकारिक आवास पर पहरा ड्यूटी के लिए की गई थी। कड़ाके की ठंड और लंबी ड्यूटी के बीच सिपाही ने परिसर में लगे अमरूद के पेड़ से कुछ फल तोड़े और खा लिए।
किसी वरिष्ठ अधिकारी की नजर जब इस पर पड़ी, तो इसे 'अनुशासनहीनता' और 'राजकीय संपत्ति का अनधिकृत उपयोग' माना गया। इसके तुरंत बाद सूबेदार-सैन्य नायक की ओर से सिपाही को एक लिखित नोटिस थमा दिया गया, जिसमें उससे इस 'कृत्य' के लिए जवाब मांगा गया।
सिपाही का मार्मिक जवाब: 'दवा नहीं थी, इसलिए खाया फल'
आमतौर पर अनुशासन के नोटिस पर सिपाही माफी मांगते हैं, लेकिन इस सिपाही ने जो स्पष्टीकरण दिया वह बेहद भावुक करने वाला था। सिपाही ने अपने लिखित जवाब में बताया:
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पेट दर्द की मजबूरी: उस दिन उसकी तबीयत ठीक नहीं थी और उसे अचानक तेज पेट दर्द (गैस/अपच) शुरू हो गया था।
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छुट्टी का अभाव: मुख्यालय में छुट्टियां बंद होने के कारण वह चिकित्सा अवकाश नहीं ले सका था।
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घरेलू नुस्खा: ड्यूटी छोड़कर दवा लेने बाहर जाना मुमकिन नहीं था। उसने बचपन में सुना था कि खाली पेट अमरूद खाने से पेट के दर्द और गैस में राहत मिलती है, इसलिए उसने मजबूरी में दो-चार फल तोड़ लिए।
महकमे में चर्चा और सोशल मीडिया पर समर्थन
सिपाही का यह जवाब जैसे ही सार्वजनिक हुआ, पूरे महकमे में इसे लेकर सहानुभूति की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर भी लोग सिपाही के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि जो जवान दिन-रात जनता की सेवा में तैनात रहते हैं, उनके साथ इतनी कठोरता ठीक नहीं है।
अधिकारियों का रुख
SDRF के उच्च अधिकारियों ने सिपाही के जवाब को गंभीरता से लिया है। सूत्रों का कहना है कि सिपाही की ईमानदारी और उसकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए विभाग अब इस मामले में कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय केवल 'चेतावनी' देकर इसे समाप्त करने पर विचार कर रहा है।
यह घटना दर्शाती है कि कभी-कभी सख्त नियमों के पीछे छिपी मानवीय मजबूरियों को समझना भी उतना ही जरूरी है जितना कि अनुशासन बनाए रखना।

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