Mission 2026: भारतीय क्रिकेट के लिए अग्निपरीक्षा का साल; वर्ल्ड कप और इंग्लैंड दौरे पर टिकीं दुनिया की नजरें
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के लिए साल 2026 महज़ एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत होने जा रहा है। टी20 वर्ल्ड कप में खिताब बचाने की चुनौती से लेकर लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट सीरीज जीतने के सपने तक, टीम इंडिया के लिए अगला 12 महीना बेहद रोमांचक और थका देने वाला होने वाला है।
टी20 वर्ल्ड कप: क्या घर में बचेगा 'विश्व विजेता' का ताज?
साल का सबसे बड़ा आकर्षण ICC पुरुष टी20 विश्व कप 2026 है, जिसकी मेजबानी भारत और श्रीलंका संयुक्त रूप से कर रहे हैं। 2024 के चैंपियन के रूप में टीम इंडिया पर दबाव होगा कि वह अपने घरेलू मैदान पर इतिहास दोहराए।
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में यह टीम पूरी तरह से युवा कलेवर में नजर आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि टी20 क्रिकेट में अब रोहित और विराट के युग के बाद शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ी टीम की नई पहचान बन चुके हैं।
इंग्लैंड और न्यूजीलैंड: विदेशी धरती पर असली इम्तिहान
2026 में टीम इंडिया का सबसे कड़ा इम्तिहान जून और जुलाई में होगा, जब टीम 5 टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए इंग्लैंड का दौरा करेगी।
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WTC का गणित: यह सीरीज वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल में पहुँचने के लिए निर्णायक साबित होगी।
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न्यूजीलैंड दौरा: साल के अंत में कीवी सरजमीं पर होने वाली सफेद गेंद की सीरीज खिलाड़ियों की फिटनेस और परिस्थितियों से तालमेल बिठाने की क्षमता की परीक्षा लेगी।
नजरें भविष्य के सितारों पर
इस साल चयनकर्ताओं का विशेष ध्यान युवा प्रतिभाओं पर रहेगा। हाल ही में अपनी उम्र और आक्रामक खेल शैली से दुनिया को चौंकाने वाले वैभव सूर्यवंशी और मिडिल ऑर्डर में फिनिशर की भूमिका निभाने वाले रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ियों के लिए यह साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की करने का सबसे बड़ा मौका है।
सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका
भले ही टी20 में युवाओं का बोलबाला हो, लेकिन वनडे और टेस्ट फॉर्मेट में रोहित शर्मा और विराट कोहली का अनुभव टीम की रीढ़ बना रहेगा। साल के उत्तरार्ध में होने वाले महत्वपूर्ण मुकाबलों में इन दोनों दिग्गजों की फॉर्म भारत की जीत की गारंटी तय करेगी।
निष्कर्ष: बदलाव और गौरव का साल
2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम भी टी20 विश्व कप में अपनी दावेदारी पेश करेगी, जिससे यह साल समग्र रूप से भारतीय क्रिकेट की वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर सकता है। अगर टीम इंडिया इन चुनौतियों को पार कर लेती है, तो वह क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में अपनी बादशाहत कायम करने के बेहद करीब होगी।

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