ऑस्कर 2026: 'कांतारा चैप्टर 1' और 'तन्वी: द ग्रेट' ने वैश्विक मंच पर गाड़े झंडे, 'बेस्ट पिक्चर' की रेस में हुईं शामिल
नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के लिए एक गौरवपूर्ण खबर सामने आई है, जहाँ ऋषभ शेट्टी की 'कांतारा: चैप्टर 1' और अनुपम खेर की निर्देशित फिल्म 'तन्वी: द ग्रेट' ने आधिकारिक तौर पर 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026) की पात्रता सूची (Reminder List) में अपनी जगह बना ली है। एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज द्वारा जारी इस सूची में दुनिया भर की कुल 201 फिल्मों को शामिल किया गया है, जो अब 'सर्वश्रेष्ठ फिल्म' (Best Picture) जैसी मुख्य श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करने के योग्य मानी गई हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि ये फिल्में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि (Official Entry) न होने के बावजूद अपने दम पर इस वैश्विक मंच तक पहुँची हैं।
ऑस्कर में प्रवेश के दो प्रमुख रास्ते होते हैं, जिनमें से इन फिल्मों ने 'सामान्य प्रविष्टि' (General Entry) के जरिए अपनी दावेदारी पेश की है। जहाँ भारत की आधिकारिक फिल्म 'होमबाउंड' (Homebound) 'सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म' की श्रेणी में संघर्ष कर रही है, वहीं 'कांतारा' और 'तन्वी: द ग्रेट' जैसी फिल्मों ने अमेरिकी सिनेमाघरों में प्रदर्शन और एकेडमी के तकनीकी मानकों को पूरा करते हुए 'फॉर योर कंसीडरेशन' (FYC) मार्ग से अपनी जगह बनाई है। यह प्रक्रिया भारतीय फिल्म निर्माताओं को मुख्य श्रेणियों में सीधे नामांकित होने का अवसर प्रदान करती है।
इन दोनों फिल्मों की कहानियाँ भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाती हैं। 'कांतारा: चैप्टर 1' जहाँ कर्नाटक की समृद्ध लोककथाओं और परंपराओं को एक भव्य प्रीक्वल के रूप में पेश करती है, वहीं 'तन्वी: द ग्रेट' ऑटिज़्म से जूझ रही एक बहादुर लड़की की प्रेरक कहानी है। इन फिल्मों का इस सूची में शामिल होना ही यह सिद्ध करता है कि भारतीय कहानियाँ अब अपनी क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचकों और दर्शकों को प्रभावित कर रही हैं।
अब सभी की निगाहें 22 जनवरी, 2026 पर टिकी हैं, जब एकेडमी अंतिम नामांकनों (Nominations) की घोषणा करेगी। यदि ये फिल्में इस चरण को पार कर लेती हैं, तो इन्हें 15 मार्च, 2026 को लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थिएटर में होने वाले भव्य ऑस्कर समारोह में सम्मानित होते देखा जा सकता है। यह न केवल इन फिल्मकारों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा, जो भारतीय सिनेमा की बदलती वैश्विक छवि को और मजबूती प्रदान करे
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