आज का पंचांग (27 दिसंबर 2025): साल के आखिरी शनिवार को सप्तमी-अष्टमी का संयोग, भद्रा और पंचक का साया; नोट करें शुभ-अशुभ मुहूर्त
नई दिल्ली। साल 2025 का आखिरी शनिवार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। पंचांग के अनुसार, कल 27 दिसंबर 2025 को पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि का मिलन हो रहा है। इसके साथ ही पूरे दिन 'पंचक' (Panchak) का प्रभाव रहेगा और दोपहर बाद 'भद्रा' (Bhadra) की छाया भी पड़ेगी, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
शनिदेव को समर्पित इस दिन पूजा-पाठ के लिए कौन सा समय सबसे उत्तम है और कब आपको सावधान रहना है, जानिए पूरा विवरण:
तिथि और नक्षत्र (Tithi & Nakshatra)
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तिथि: पौष शुक्ल सप्तमी दोपहर 01:09 बजे तक रहेगी। इसके तुरंत बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी।
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नक्षत्र: सुबह 09:10 बजे तक पूर्व भाद्रपद नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
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योग: 'व्यतीपात' योग दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा।
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चंद्रमा: चंद्रमा पूरे दिन मीन राशि (Pisces) में गोचर करेंगे, जिसके कारण पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।
शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
यदि आप पूजा-पाठ या कोई महत्वपूर्ण कार्य करना चाहते हैं, तो 'अभिजीत मुहूर्त' का समय सबसे श्रेष्ठ है:
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 12:42 बजे तक।
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:23 बजे से 06:18 बजे तक (ध्यान और स्नान के लिए उत्तम)।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:06 बजे से 02:47 बजे तक।
सावधान! आज इन समयों पर न करें शुभ काम (Ashubh Muhurat)
शनिवार के दिन राहुकाल और भद्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
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राहुकाल (Rahu Kaal): सुबह 09:47 बजे से 11:05 बजे तक। (इस दौरान कोई भी नया कार्य शुरू न करें)।
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भद्रा (Bhadra): दोपहर 01:09 बजे से शुरू होकर देर रात तक रहेगी। शास्त्रों में भद्रा काल के दौरान मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है।
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पंचक (Panchak): पूरे दिन जारी रहेगा। (लकड़ी इकट्ठा करना या दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित है)।
आज के विशेष उपाय (Remedies for Saturday)
चूंकि यह साल का अंतिम शनिवार है, इसलिए शनि दोष, ढैय्या या साढ़े साती से प्रभावित लोगों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है।
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शनि पूजन: सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
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दान: काले तिल, काली उड़द या कंबल का दान करना विशेष फलदायी होगा।
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मंत्र: 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का 108 बार जाप करें।
(नोट: यह जानकारी पंचांग की गणनाओं पर आधारित है। अपने शहर के सटीक सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।)

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