महाशिवरात्रि विशेष : राजिम के भूतेश्वरनाथ महादेव दर्शन को उमड़ रहे श्रद्धालु,शिवभक्ति की बह रही धारा
राजिम। छत्तीसगढ़ का पवित्र तीर्थ राजिम, जिसे प्रदेश का प्रयाग कहा जाता है, इन दिनों कुंभ कल्प मेले के दौरान आस्था का केंद्र बना हुआ है। वैसे तो राजिम को शिवालयों की नगरी भी कहा जाता है। यहां संगम तट पर स्थित कुलेश्वरनाथ, राजराजेश्वर, दानेश्वर, पंचेश्वरनाथ, गरीबनाथ, सोमेश्वरनाथ, बटुकेश्वरनाथ और भुवनेश्वरनाथ जैसे अनेक प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। हरी और हर की इस पावन नगरी में शिवभक्ति की धारा निरंतर बह रही है।
राजीव लोचन मंदिर के सामने और पूर्व महोत्सव मंच के दाईं ओर स्थित प्राचीन भूतेश्वरनाथ महादेव का मंदिर स्थित है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को राजिम का सबसे ऊंचा शिवलिंग माना जाता है, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
भूतेश्वरनाथ महादेव मंदिर को कल्चुरी काल का प्राचीन मंदिर माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण लगभग 14वीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर ईंट और पत्थरों से बना है और इसकी बनावट चौकोर आकार में है। मंदिर की मजबूत नींव और सुंदर शिल्पकारी लोगों को आकर्षित करती है।

मंदिर के अंदर तीन मुख्य भाग हैं
महामंडप, अंतराल और गर्भगृह। महामंडप में छह पत्थर के स्तंभ हैं, जो नीचे चौकोर और ऊपर गोल आकार में बने हैं। मंदिर पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए है। गर्भगृह में काले पत्थर से बना भूतेश्वरनाथ महादेव का शिवलिंग स्थापित है, जिसकी ऊंचाई तीन फीट से अधिक है। इसीलिए इसे राजिम का सबसे ऊंचा शिवलिंग कहा जाता है।
मंदिर की दीवारों पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित अन्य देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां उकेरी गई हैं। दक्षिण दिशा में गंगा मैया और उत्तर दिशा में मां दुर्गा की प्रतिमाएं अंकित हैं। मान्यता है कि भूतेश्वरनाथ महादेव की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और आत्मिक शांति मिलती है। कुंभ कल्प मेले के दौरान भगवान कुलेश्वर महादेव, भगवान राजीवलोचन के साथ-साथ यहां भी श्रद्धालु दर्शन लाभ ले रहे है।

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