अजीबोगरीब दावा: "मुझसे रोज मिलने आते हैं एलियन!" अमेरिकी महिला ने बताया परग्रहियों का रूप और पहनावा
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। ब्रह्मांड में क्या हम अकेले हैं? यह सवाल सदियों से वैज्ञानिकों को मथता रहा है, लेकिन अमेरिका की एक महिला ने इस पर ऐसा दावा किया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। अमेरिका के सेंट लुइस (मिसौरी) की रहने वाली लिली नोवा का दावा है कि वे पिछले पांच वर्षों से एलियंस और यूएफओ (UFO) के नियमित संपर्क में हैं। उनका कहना है कि ये परग्रही उनसे रोज मिलने आते हैं और अब उनके बीच एक 'रिश्ता' सा बन गया है।
लॉकडाउन के दौरान शुरू हुआ सिलिसला
लिली नोवा के अनुसार, यह सब साल 2021 में शुरू हुआ। कोविड लॉकडाउन के दौरान बोरियत दूर करने के लिए उन्होंने एस्ट्रोफोटोग्राफी (खगोलीय छायांकन) को एक शौक के रूप में अपनाया। नवंबर 2021 की एक रात जब वे ताजी हवा लेने बाहर निकलीं, तो उन्होंने अपने पड़ोस के ऊपर एक अजीबोगरीब चमकता हुआ यान मंडराते देखा। लिली का कहना है कि वह एक त्रिकोणीय आकार का यूएफओ था, जो सामान्य विमानों से बिल्कुल अलग हरकत कर रहा था।
कैसा दिखता है एलियन?
लिली ने केवल यान ही नहीं, बल्कि उन प्राणियों को देखने का भी दावा किया है। उनके विवरण के अनुसार:
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नीली त्वचा वाली एलियन: लिली का कहना है कि उनसे मिलने वाली पहली प्राणियों में से एक हल्के नीले रंग की त्वचा वाली लड़की थी। उसके सिर पर बाल नहीं थे और उसने ग्रे रंग का स्किन-फिट सूट पहन रखा था।
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गोरे और सुनहरे बालों वाले प्राणी: उन्होंने सुनहरे बालों, दमकती त्वचा और नीली आँखों वाले प्राणियों के एक अन्य समूह को भी देखने का दावा किया है।
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टेलीपैथी से संवाद: लिली का मानना है कि ये प्राणी उनसे बोलकर नहीं, बल्कि 'टेलीपैथी' (दिमाग से दिमाग का संपर्क) के माध्यम से बात करते हैं और तस्वीरें भेजते हैं।
करियर छोड़कर एलियंस की खोज में जुटीं
इस अनुभव ने लिली की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। वे पहले एक न्यूट्रिशनिस्ट (पोषण विशेषज्ञ) के रूप में काम कर रही थीं, लेकिन एलियंस और यूएफओ के बारे में और अधिक जानने की तीव्र इच्छा के कारण उन्होंने अपना करियर छोड़ दिया। उनका कहना है कि अब उनमें एक 'सिक्स्थ सेंस' (छठी इंद्री) विकसित हो गई है, जिससे उन्हें पहले ही पता चल जाता है कि एलियन कब प्रकट होने वाले हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
हालांकि लिली नोवा के दावे सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय इसे 'मनोवैज्ञानिक भ्रम' या 'आकाशीय घटनाओं के गलत अर्थ' के रूप में देखता है। अब तक किसी भी आधिकारिक स्पेस एजेंसी या वैज्ञानिक संस्था ने लिली के इन दावों या उनकी तस्वीरों की पुष्टि नहीं की है।

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