पंचांग (11 जनवरी 2026) : रविवार को अष्टमी तिथि और 'सुकर्मा' योग का संयोग, जानें आज का शुभ मुहूर्त और राहुकाल
नई दिल्ली। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक दिन का अपना एक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र, योग और करण की गणना कर शुभ कार्यों के लिए सही समय का चुनाव करते हैं। आइए जानते हैं 11 जनवरी 2026 का पंचांग, ग्रहों की स्थिति और आज के विशेष मुहूर्त।
आज की तिथि और नक्षत्र
आज पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। रविवार का दिन भगवान सूर्य और काल भैरव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
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तिथि: अष्टमी (पूरे दिन और रात)
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वार: रविवार
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नक्षत्र: चित्रा (सुबह 11:28 AM तक), उसके बाद स्वाति नक्षत्र प्रारंभ।
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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मास: पौष
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विक्रम संवत: 2082
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
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सूर्योदय: सुबह 07:15 AM
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सूर्यास्त: शाम 05:43 PM
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चंद्रोदय: अगले दिन 12:41 AM (12 जनवरी)
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चंद्रास्त: दोपहर 11:42 AM
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चंद्र राशि: तुला (पूरे दिन और रात)
आज के शुभ और अशुभ समय (Muhurat)
पंचांग के अनुसार, आज के महत्वपूर्ण मुहूर्त निम्नलिखित हैं:
| समय का प्रकार | समय (Time) |
| अभिजीत मुहूर्त (अति शुभ) | दोपहर 12:09 PM से 12:51 PM तक |
| राहुकाल (वर्जित समय) | शाम 04:24 PM से 05:43 PM तक |
| गुलिक काल | दोपहर 03:06 PM से 04:24 PM तक |
| यमगण्ड | दोपहर 12:29 PM से 01:47 PM तक |
विशेष नोट: कोई भी मांगलिक कार्य या नई शुरुआत करने के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। राहुकाल के दौरान शुभ कार्यों से बचना चाहिए।
आज का योग और करण
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योग: सुकर्मा (सुबह 10:28 AM तक), उसके बाद धृति योग।
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करण: बालव (रात 10:14 PM तक), उसके बाद कौलव करण।
आज का दिशाशूल
रविवार के दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहता है। यदि इस दिशा में यात्रा करना अनिवार्य हो, तो घर से निकलने से पहले थोड़ा दलिया या घी खाकर निकलना शुभ माना जाता है।
आज का धार्मिक महत्व
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भैरवाष्टमी: कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव की पूजा का विधान है। रविवार और अष्टमी का संयोग होने से आज भैरव जी की उपासना से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
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सूर्य उपासना: आज सूर्य देव को अर्घ्य देने और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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