प्रदेश में सख्त प्रशासनिक लॉकडाउन, अधिकारी-कर्मचारियों तबादलों पर पूर्ण ब्रेक
- मुख्यमंत्री की मंजूरी के बिना हिलना मुश्किल
रायपुर। जनगणना की तैयारियों के बीच राज्य शासन का ताजा फैसला साफ संकेत देता है कि इस बार प्रशासन कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता। जनगणना जैसे विशाल और संवेदनशील राष्ट्रीय कार्य को लेकर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो अधिकारी जहां तैनात हैं, वे वहीं रहेंगे। बीच में तबादलों की राजनीति या प्रशासनिक फेरबदल इस प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने दिए जाएंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। 25 जून 2025 से लागू तबादला प्रतिबंध को अब जनगणना से सीधे जोड़ दिया गया है। यानी अब स्थानांतरण सिर्फ अत्यंत जरूरी हालात में ही संभव होगा, वह भी विभागीय सहमति और मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद। यह कोई सामान्य प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि एक तरह से फील्ड मशीनरी को स्टेबल रखने की रणनीति है।
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर पहले ही स्पष्ट रुख अपना लिया था। 11 मार्च 2026 को जारी अद्र्धशासकीय पत्र में राज्यों को सलाह दी गई थी कि जनगणना से जुड़े कर्मचारियों को कार्य पूर्ण होने तक यथासंभव स्थिर रखा जाए। अब राज्य शासन ने इसे सख्ती से लागू करने का फैसला लेकर संकेत दे दिया है कि इस बार प्रोसेस से ज्यादा परिणाम पर ध्यान है। इस फैसले के कई प्रशासनिक मायने हैं। पहला, फील्ड स्तर पर जवाबदेही तय होगी—जो अधिकारी काम कर रहा है, वही अंत तक उसकी जिम्मेदारी निभाएगा। दूसरा, स्थानीय स्तर पर बने नेटवर्क और समझ का फायदा मिलेगा, जो बार-बार बदलाव से टूट जाता है। और तीसरा, राजनीतिक या बाहरी दबाव में होने वाले तबादलों पर भी अप्रत्यक्ष अंकुश लगेगा।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार का यह फैसला प्रशासनिक अनुशासन, डेटा गुणवत्ता और राष्ट्रीय दायित्व तीनों को साधने की कोशिश है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कितना सख्ती से पालन होता है। क्योंकि कागज पर लिए गए फैसले तभी असरदार होते हैं, जब वे फील्ड में भी उसी दृढ़ता के साथ लागू हों।

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