राजराजेश्वरी प्रेमाम्बा पाटोत्सव: स्फटिक विग्रह के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

Rajarajeshwari Premamba Patotsav

राजराजेश्वरी प्रेमाम्बा पाटोत्सव: स्फटिक विग्रह के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

रायपुर। बोरियाकला स्थित शंकराचार्य आश्रम में भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी का 21वां पाटोत्सव श्रद्धा और भक्ति के माहौल में धूमधाम से मनाया गया। दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज के सानिध्य में आयोजित इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और माता को फल, मिष्ठान्न तथा कुमकुम अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की।

दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज ने बताया कि वर्ष 2006 में वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा इस दिव्य स्फटिक मणिमय विग्रह की स्थापना की गई थी। उन्होंने प्रदेश की समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना के साथ देवी को ‘प्रेमाम्बा’ नाम दिया था। यह विग्रह छत्तीसगढ़वासियों के लिए आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष केंद्र माना जाता है।

चार दिवसीय नगर भ्रमण के बाद लौटी चल मूर्ति

पाटोत्सव से पहले परंपरा के अनुसार माता की ‘चल मूर्ति’ (उत्सव विग्रह) चार दिनों तक नगर भ्रमण पर रही। यह भव्य शोभायात्रा तात्यापारा, संतोषी नगर और बोरियाकला सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए पुनः शंकराचार्य आश्रम पहुंची।

आश्रम में आचार्य धर्मेंद्र महाराज और अन्य वैदिक विद्वानों ने विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।