छत्तीसगढ़ विधानसभा से पारित हुआ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026, अवैध प्लॉटिंग पर लगेगा अंकुश
रायपुर। छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को व्यवस्थित करने और अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह विधेयक वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा सदन में प्रस्तुत किया गया था।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना और अनियंत्रित विस्तार पर नियंत्रण स्थापित करना है। वित्त मंत्री ने सदन में बताया कि वर्तमान में नगर विकास योजनाएं मुख्यतः रायपुर विकास प्राधिकरण और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण जैसे सीमित संस्थानों पर निर्भर हैं, जबकि बढ़ते शहरीकरण के साथ अधिक एजेंसियों की भागीदारी जरूरी हो गई है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विभिन्न एजेंसियों की सहभागिता से बेहतर शहरी विकास मॉडल सामने आए हैं। इसी तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी विकास योजनाओं का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
संशोधन के तहत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा-38 में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार अब नगर विकास योजनाओं को तैयार और लागू करने के लिए अधिकृत एजेंसियों का दायरा बढ़ाया गया है। अब नगर एवं ग्राम विकास प्राधिकरणों के साथ-साथ राज्य शासन के अन्य अभिकरण, स्थानीय निकाय और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां भी इन योजनाओं को लागू कर सकेंगी।
वित्त मंत्री ने बताया कि इस कदम से न केवल विकास योजनाओं की संख्या बढ़ेगी, बल्कि औद्योगिक और आवासीय विकास को भी गति मिलेगी। साथ ही, व्यवस्थित भूखंडों की उपलब्धता सुनिश्चित होने से अवैध प्लॉटिंग पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस विधेयक के पारित होने पर कहा कि यह निर्णय राज्य में संतुलित और सुनियोजित शहरी विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण बेहद जरूरी था, जिसे यह संशोधन मजबूत करेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी से विकास कार्यों में तेजी आएगी, जिससे शहरों में बेहतर अधोसंरचना, सुव्यवस्थित आवास और उद्योगों के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप विकसित करना है।

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