युद्धों की आग में झुलस रही दुनिया की अर्थव्यवस्था; 2029 तक विश्व का कुल कर्ज GDP के 100% तक पहुँचने का अनुमान
वाशिंगटन : अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। IMF की ताज़ा 'फिस्कल मॉनिटर' (Fiscal Monitor) रिपोर्ट के अनुसार, युद्धों के कारण बढ़ते खर्च और धीमी अर्थव्यवस्था की वजह से दुनिया पर चढ़ा कर्ज का बोझ साल 2029 तक वैश्विक जीडीपी (GDP) के 100 प्रतिशत तक पहुँच सकता है।
यह कर्ज का वह स्तर है जो आखिरी बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देखा गया था। लगातार हो रहे भू-राजनीतिक संघर्ष और बढ़ती ब्याज दरें सरकारों के खजाने पर भारी दबाव डाल रही हैं।
1. कर्ज की रफ़्तार ने उड़ाई नींद
IMF के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में वैश्विक सार्वजनिक ऋण (Global Public Debt) पहले ही जीडीपी के 94 प्रतिशत के करीब पहुँच चुका है। 2029 तक इसके 100% होने का मतलब यह है कि दुनिया की सरकारों पर उतना कर्ज होगा, जितना पूरी दुनिया मिलकर एक साल में सामान और सेवाएं उत्पादित करती है।
2. युद्ध और ऊर्जा संकट का दोहरा प्रहार
IMF के राजकोषीय मामलों के विभाग के निदेशक ने बताया कि पश्चिम एशिया (ईरान और इज़राइल-अमेरिका संघर्ष) में जारी तनाव ने वैश्विक राजकोषीय स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
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रक्षा खर्च में बढ़ोतरी: युद्धों की वजह से दुनिया भर की सरकारें अपने बजट का बड़ा हिस्सा रक्षा और हथियारों पर खर्च कर रही हैं।
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ऊर्जा और तेल की कीमतें: ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और तेल की कीमतों में उछाल ने महंगाई बढ़ा दी है, जिससे सरकारों को सब्सिडी देने के लिए और अधिक कर्ज लेना पड़ रहा है।
3. ब्याज दरों का 'ट्रैप'
पिछले चार वर्षों में, वैश्विक ऋण पर ब्याज भुगतान जीडीपी के 2% से बढ़कर लगभग 3% हो गया है। अमेरिका और चीन जैसे बड़े देश भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक:
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अमेरिका: अमेरिका का सार्वजनिक घाटा जीडीपी का 7-8% चल रहा है, जिससे उसका कुल कर्ज 2031 तक 142% पहुँचने का अनुमान है।
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चीन: घरेलू मांग में कमी और आर्थिक मंदी से निपटने के लिए चीन भी भारी कर्ज ले रहा है, जो 2031 तक उसकी जीडीपी का 126% हो सकता है।
4. IMF की सरकारों को सलाह
IMF ने चेतावनी दी है कि सरकारों के पास अब झटकों को सहने की क्षमता (Fiscal Space) कम होती जा रही है। संस्था ने सुझाव दिया है कि:
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सरकारों को ईंधन सब्सिडी को धीरे-धीरे खत्म करना चाहिए।
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टैक्स के दायरे को बढ़ाना चाहिए ताकि राजस्व में बढ़ोतरी हो सके।
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कर्ज को कम करने के लिए मध्यम अवधि की ठोस राजकोषीय योजनाएं बनानी चाहिए।

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