विधानसभा के विशेष सत्र में शासकीय संकल्प पर चर्चा
लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान विपक्षी हंगामे के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया। आंसदी ने इस प्रस्ताव के लिए चार घंटे का समय निर्धारित किया।
मुख्यमंत्री साय के प्रस्ताव के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने अशासकीय संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे आंसदी ने अस्वीकार कर दिया। इस पर डॉ. महंत ने आपत्ति जताते हुए कहा, "मुख्यमंत्री तो निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे, लेकिन यह शासकीय संकल्प प्रस्ताव निंदा पर आधारित नहीं है।"
वहीं, विपक्षी दलों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सत्ता पक्ष महिलाओं को गुमराह कर रहा है, और यह स्थिति सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह बनी हुई है। विपक्ष ने दावा किया कि महिलाओं के हित में काम करने का दावा किया जा रहा है, जबकि असल में उन्हें धोखा दिया जा रहा है।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक लता उसेंडी ने कहा, "महिला आरक्षण पर रुकावट डालने का काम विपक्ष ने किया। महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में गिराने का भी काम विपक्ष ने किया। महिलाओं की भावनाओं और सम्मान का ध्यान नहीं रखा गया।"
कांग्रेस पार्टी का पक्ष रखते हुए विधायक अनिला भेड़िया ने कहा, "कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है। यह बिल 2029 में लागू होना चाहिए, और 2023 में इसे पारित किया गया है। इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा, "जो लोग नारी का अपमान करते हैं, उनका विनाश निश्चित है। रामायण में माता सीता का हरण और रावण का विनाश नारी अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का प्रतीक है।"
इस दौरान, विधानसभा में गहमागहमी के बीच महिला आरक्षण बिल पर बहस जारी रही, जबकि विपक्षी दलों ने सत्ता पक्ष की नीतियों पर सवाल उठाए और महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे को लेकर अपना विरोध जताया।
अशासकीय संकल्प पर स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि विशेष सत्र के विषय निश्चित रहते हैं। इसके लिए शासकीय संकल्प प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके बाद परम्परानुसार कोई अशासकीय संकल्प पर चर्चा हो नहीं सकती। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के अशासकीय संकल्प को अग्राहा कर दिया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले निंदा प्रस्ताव लाने की बात कह रहे थे।
इस पर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि बाहर कही गई बातों पर सदन के भीतर चर्चा नहीं हो सकती है। स्पीकर ने भी इस पर सहमति जताई। इसके बाद भाजपा सदस्य लता उसेंडी ने प्रथम वक्ता के रूप में चर्चा की शुरूआत की।
दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि
सत्र की शुरुआत में पूर्व सांसद मोहसीना किदवई के निधन का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके साथ ही मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व विधायक जगेश्वरराम भगत को सदन में याद कर सम्मान अर्पित किया जाएगा।

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