‘प्रचार ऐप’ से आउटडोर मीडिया की रियल-टाइम निगरानी

‘प्रचार ऐप’ से आउटडोर मीडिया की रियल-टाइम निगरानी
जनसंपर्क में ‘सुशासन’: प्रिंटिंग माफियाओं पर शिकंजा
रायपुर (चैनल इंडिया)। राज्य में सरकारी प्रचार-प्रसार व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधार शुरू किए गए हैं। जनसंपर्क विभाग ने एक ओर प्रिंटिंग कार्यों में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई करते हुए कथित प्रिंटिंग माफिया पर लगाम कसने की पहल की है, वहीं दूसरी ओर आउटडोर मीडिया की निगरानी के लिए तकनीक आधारित प्रचार ऐप लागू कर दिया गया है। इन दोनों कदमों को शासन के खर्च में पारदर्शिता लाने और सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अनियमितताओं को रोकने के लिए अब यह व्यवस्था लागू की गई है कि सभी शासकीय प्रिंटिंग कार्य संवाद के माध्यम से ही कराए जाएंगे। यदि किसी विभाग को अन्य एजेंसी से छपाई करानी है तो पहले संवाद से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। बिना एनओसी के किसी भी प्रकार का भुगतान कोषालय से जारी नहीं किया जाएगा। प्रिंटिंग से जुड़ी लगातार शिकायतों को देखते हुए मौजूदा टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। विभाग अब एक नई और पारदर्शी प्रिंटिंग पॉलिसी तैयार कर रहा है। इसके लिए अन्य राज्यों की मुद्रण नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है। 
सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में आउटडोर मीडिया की अहम भूमिका है। इसमें होर्डिंग्स, यूनिपोल्स, डिजिटल वॉल पेंटिंग्स, ब्रांडिंग और एलईडी वैन अभियान शामिल हैं। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और प्रमुख सडक़ों जैसे स्थानों पर इनका प्रभाव व्यापक होता है। कई शिकायतों में यह सामने आया कि वेंडर्स द्वारा विज्ञापन लगाने में देरी की जाती है या तय अवधि से पहले उन्हें हटाकर व्यावसायिक विज्ञापन लगा दिए जाते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए जनसंपर्क विभाग ने तकनीक आधारित प्रचार ऐप विकसित किया है। 
यह नई व्यवस्था एक अप्रैल से होर्डिंग्स और यूनिपोल्स के लिए लागू कर दी गई है। विभाग की योजना है कि इसे जल्द ही एलईडी स्क्रीन, ब्रांडिंग और डिजिटल वॉल पेंटिंग्स जैसे अन्य माध्यमों तक भी विस्तारित किया जाए। जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने 28 अप्रैल को पैनल में शामिल एजेंसियों के साथ कार्यशाला आयोजित कर इस नई प्रणाली को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक आधारित मॉनिटरिंग से ही पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।