महिला आरक्षण बिल का विरोध करना बेइमानी है, यह देश की माता-बहनों के साथ विश्वासघातः विजय शर्मा
रायपुर। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। विजय शर्मा ने इस घटनाक्रम को देश की महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि इस कानून का विरोध करना आधी आबादी का अपमान करने जैसा है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि विपक्ष का यह रुख उनकी ष्बेईमानीष् को दर्शाता है, क्योंकि वे महिलाओं को उनका उचित अधिकार देने की राह में रोड़ा अटका रहे हैं।
न्यूज एजेंसी से चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कोई भी दल देश की आधी आबादी को महज 33 प्रतिशत आरक्षण देने से कैसे पीछे हट सकता है? शर्मा ने जोर देकर कहा कि सरकार तो महिलाओं को आधा हक भी नहीं, बल्कि केवल एक तिहाई आरक्षण देने की बात कर रही थी, फिर भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ मतदान कर अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया है। उन्होंने इसे देश की माताओं और बहनों के साथ किया गया विश्वासघात करार दिया।
संसदीय सीटों के परिसीमन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए विजय शर्मा ने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए सीटों की संख्या बढ़ाना समय की मांग और एक जरूरी कदम है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में एक सांसद के पीछे की आबादी काफी बढ़ चुकी है, ऐसे में बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए सीटों का बढ़ना अनिवार्य है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जब परिसीमन की प्रक्रिया से सभी राज्यों की सीटें बढ़ रही थीं, तो इसमें किसी भी दल को आपत्ति क्यों होनी चाहिए?
उपमुख्यमंत्री ने अंत में फिर दोहराया कि कांग्रेस और विपक्षी खेमे ने इस ऐतिहासिक विधेयक के खिलाफ खड़े होकर ऐतिहासिक भूल की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास इस विरोध का कोई ठोस आधार नहीं है और जनता इस ष्बेईमानीष् को देख रही है। शर्मा के अनुसार, यह विधेयक केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं था, बल्कि महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम था, जिसे विपक्ष ने राजनीति की भेंट चढ़ा दिया।

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