पैरेंटिंग टिप्स: बच्चों को 'ना' सुनना सिखाना क्यों है जरूरी? उनकी सफलता के लिए अपनाएं ये 5 तरीके
नई दिल्ली: आजकल के दौर में माता-पिता अपने बच्चों की हर छोटी-बड़ी जिद को तुरंत पूरा कर देते हैं। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चों को वह सब मिले जो हमें नहीं मिल पाया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह 'अति-सुविधा' (Over-indulgence) भविष्य में उनके लिए घातक साबित हो सकती है?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जो बच्चे बचपन में कभी 'ना' (No) नहीं सुनते, वे बड़े होकर छोटी सी असफलता या रिजेक्शन (Rejection) को भी बर्दाश्त नहीं कर पाते। शैक्षिक रूप से अव्वल होने के बावजूद, जीवन की चुनौतियों के सामने वे मानसिक रूप से कमजोर पड़ सकते हैं।
क्यों जरूरी है बच्चों को 'ना' कहना?
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धैर्य की क्षमता विकसित करना: जब आप बच्चे की हर मांग तुरंत पूरी नहीं करते, तो उनमें धैर्य (Patience) पैदा होता है। वे समझते हैं कि हर चीज उनके मनमुताबिक तुरंत नहीं मिल सकती।
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असफलता का सामना करना: जीवन हमेशा जीत के बारे में नहीं होता। यदि बच्चा बचपन में ही 'ना' सुनना सीख जाता है, तो वह भविष्य में मिलने वाले बड़े रिजेक्शन को संभालने के काबिल बनता है।
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मानसिक मजबूती: पढ़ाई में अव्वल आना ही काफी नहीं है। भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) के लिए यह जरूरी है कि बच्चा अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सीखे।
माता-पिता के लिए कुछ खास टिप्स:
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तर्क के साथ 'ना' कहें: बच्चों को बिना कारण 'ना' न बोलें। उन्हें समझाएं कि आप उनकी मांग क्यों पूरी नहीं कर रहे हैं। इससे उनका आप पर भरोसा बना रहता है।
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जिद के आगे न झुकें: अक्सर बच्चे पब्लिक प्लेस में या रोकर अपनी बात मनवा लेते हैं। अगर आप एक बार उनकी जिद के आगे झुक गए, तो वे इसे अपना हथियार बना लेंगे।
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विकल्प दें: अगर आप किसी चीज के लिए मना कर रहे हैं, तो उन्हें कोई दूसरा विकल्प दें ताकि उन्हें लगे कि उनकी भावनाओं का सम्मान किया जा रहा है।
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परिश्रम का महत्व समझाएं: बच्चों को सिखाएं कि कोई भी चीज आसानी से नहीं मिलती। जब वे किसी उपलब्धि के लिए मेहनत करेंगे, तो उन्हें उसकी असली कीमत समझ आएगी।

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