चमत्कारी इलाज बना मौत का कारण, धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत पहली बार सजा, महिला को उम्रकैद

चमत्कारी इलाज बना मौत का कारण, धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत पहली बार सजा, महिला को उम्रकैद

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत पहली बार किसी आरोपी को सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी अधिनियम, पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने ‘चमत्कारी इलाज’ के नाम पर युवती की मौत के मामले में आरोपी ईश्वरी साहू (41) को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र के सुरसाबांधा गांव की रहने वाली ईश्वरी साहू पर आरोप था कि उसने बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के 18 वर्षीय योगिता सोनवानी का इलाज करने का दावा किया। जनवरी से मई 2025 के बीच उसने युवती का अपने घर में चमत्कारी तेल, गर्म पानी और धार्मिक प्रार्थनाओं के जरिए इलाज किया।

इलाज के दौरान युवती की हालत लगातार बिगड़ती गई और 22 मई 2025 को उसकी मौत हो गई। इसके बाद मृतका की मां सुनीता सोनवानी ने राजिम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां आरोपी को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह फैसला प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत सुनाई गई पहली सजा है।