स्कूलों में बड़ा बदलाव: मंत्रोच्चार, AI शिक्षा और एक्टिविटी डे की नई पहल
रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि अब सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ-साथ दो-तीन मंत्रों के उच्चारण से होगी। इसके साथ ही हर महीने जिन महापुरुषों की जयंती होगी, उन पर कुछ मिनट का व्याख्यान भी विद्यार्थियों को दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और मंत्रोच्चार से होगी, वहीं शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी जोर दिया जाएगा। बच्चों को पारंपरिक ज्ञान जैसे बारहखड़ी से लेकर आधुनिक तकनीक जैसे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तक की जानकारी दी जाएगी। हर महीने दो-तीन महापुरुषों पर विशेष व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।
मंत्री ने बताया कि गुरुवार को हिंदी और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के शिक्षकों के साथ बैठक एवं कार्यशाला आयोजित की गई है, जिसमें प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में AI आधारित शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है। इस दिशा में गूगल के अधिकारी भी शिक्षकों को प्रशिक्षण देने और चर्चा के लिए शामिल होंगे, ताकि बच्चों को नई तकनीकों से जोड़ा जा सके।
उन्होंने जानकारी दी कि शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 अप्रैल से 15 जून तक चलेगा। साथ ही स्कूल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए प्रिंसिपलों की भी ट्रेनिंग होगी। सरकार की कोशिश है कि 16 जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन छात्रों को सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध करा दिए जाएं। इसके लिए विभिन्न विभागों से समन्वय किया जा रहा है।
सहायक वाचन सामग्री में छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों को भी शामिल किया जाएगा। दैनिक दिनचर्या में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के साथ मंत्रोच्चार और महापुरुषों पर संक्षिप्त व्याख्यान अनिवार्य होगा।
बैगलेस डे की जगह एक्टिविटी डे
मंत्री ने बताया कि शनिवार को अब बैगलेस डे के बजाय एक्टिविटी डे के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन बच्चों को स्थानीय खेल, तीज-त्योहार, योग, गार्डनिंग और हाउसकीपिंग जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा, जिससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर जुड़ाव हो सके।
स्कूलों की मनमानी पर सख्ती
मंत्री ने यह भी कहा कि निजी किताबें खरीदने के लिए छात्रों और अभिभावकों पर दबाव बनाने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम एनसीईआरटी की किताबों पर आधारित होगा। वहीं स्कूल फीस की मनमानी पर नियंत्रण के लिए फीस विनियमन आयोग को सक्रिय कर जांच के निर्देश दिए जाएंगे।

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