क्या थम जाएगा ईरान-इजरायल युद्ध? ट्रंप का बड़ा दांव और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर मचे घमासान के बीच दुनिया की नजरें अमेरिका पर

क्या थम जाएगा ईरान-इजरायल युद्ध? ट्रंप का बड़ा दांव और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर मचे घमासान के बीच दुनिया की नजरें अमेरिका पर

वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ती सैन्य तकरार ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष को समाप्त करने और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को सुरक्षित रखने के लिए एक आक्रामक और रणनीतिक रुख अपनाया है।

ट्रंप की 'पीस थ्रू स्ट्रेंथ' नीति

अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह क्षेत्र में किसी भी बड़े युद्ध को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • युद्ध समाप्ति का संकल्प: राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार दोहराया है कि उनका लक्ष्य चल रहे संघर्षों को खत्म करना है। उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए शांति बहाली की दिशा में ठोस कदम उठाने की बात कही है।

  • रणनीतिक दबाव: अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने सैन्य बेड़े को सक्रिय रखा है ताकि किसी भी संभावित बड़े हमले को रोका जा सके।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज: दुनिया की सबसे संवेदनशील नस

इस पूरे विवाद के केंद्र में 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' है, जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है।

  • ईरान की धमकी: ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि उस पर सीधा हमला हुआ, तो वह इस समुद्री मार्ग को बंद कर सकता है।

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा: यदि यह मार्ग बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ जाएंगे। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह इस मार्ग की सुरक्षा में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

इजरायल और ईरान की तनातनी

इजरायल ने हाल के दिनों में ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य ठिकानों पर कड़े प्रहार की बात कही है। दूसरी ओर, ईरान ने अपनी रक्षा प्रणालियों को 'हाई अलर्ट' पर रखा है। ट्रंप प्रशासन अब दोनों पक्षों के बीच एक ऐसी 'बार्गेनिंग' (Bargaining) की कोशिश कर रहा है जिससे युद्ध को टाला जा सके।

भारत और दुनिया पर असर

मिडिल ईस्ट में शांति भारत के लिए सामरिक और आर्थिक दोनों लिहाज से जरूरी है:

  1. तेल की कीमतें: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है।

  2. भारतीय प्रवासी: खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कार्यरत हैं, जिनकी सुरक्षा सर्वोपरि है।

  3. सप्लाई चेन: युद्ध खिंचने से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।