अंतरिक्ष में क्यों बढ़ जाती है एस्ट्रोनॉट्स की लंबाई? समझें गुरुत्वाकर्षण और मानव शरीर का विज्ञान

अंतरिक्ष में क्यों बढ़ जाती है एस्ट्रोनॉट्स की लंबाई? समझें गुरुत्वाकर्षण और मानव शरीर का विज्ञान

नई दिल्ली। ब्रह्मांड के रहस्य हमेशा से ही वैज्ञानिकों और आम लोगों को हैरान करते रहे हैं। इन्ही रहस्यों में से एक है अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) की लंबाई का बढ़ जाना। जब कोई अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में कुछ महीने बिताकर वापस धरती पर लौटता है, तो उसकी लंबाई में 2 इंच (लगभग 5 सेंटीमीटर) तक की बढ़ोतरी देखी जाती है।

लेकिन ऐसा क्यों होता है? क्या यह स्थायी बदलाव है? आइए जानते हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक और गणितीय कारण।

1. गुरुत्वाकर्षण का अभाव और रीढ़ की हड्डी (The Science of Spinal Expansion)

धरती पर, गुरुत्वाकर्षण (Gravity) लगातार हमारे शरीर को नीचे की ओर खींचता है। हमारी रीढ़ की हड्डी (Spine) कशेरुकाओं (Vertebrae) से बनी होती है, जिनके बीच में लचीली डिस्क होती हैं। ये डिस्क एक 'शॉक एब्जॉर्बर' की तरह काम करती हैं।

धरती के गुरुत्वाकर्षण के कारण ये डिस्क दबी रहती हैं (Compression)। लेकिन अंतरिक्ष में 'माइक्रोग्रैविटी' (Microgravity) की स्थिति होती है। वहां गुरुत्वाकर्षण का खिंचाव न होने के कारण रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाला दबाव खत्म हो जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी फैलने लगती है। इसी विस्तार (Expansion) के कारण अंतरिक्ष यात्री की लंबाई बढ़ जाती है।

2. गुरुत्वाकर्षण का गणित (The Mathematics of Gravity)

इसे गणितीय नजरिए से समझें तो न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के नियम ($F = G \frac{m1 \cdot m2}{r^2}$) के अनुसार, जैसे-जैसे दूरी ($r$) बढ़ती है, गुरुत्वाकर्षण बल ($F$) कम होता जाता है।

पृथ्वी की सतह से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर (जहाँ ISS स्थित है), गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में लगभग 90% होता है। हालांकि वहां गुरुत्वाकर्षण पूरी तरह शून्य नहीं होता, लेकिन अंतरिक्ष यान की निरंतर गिरती हुई स्थिति (Free-fall) के कारण 'भारहीनता' का अनुभव होता है। यही भारहीनता शरीर के जोड़ों और रीढ़ को फैलने का मौका देती है।

3. क्या यह बदलाव स्थायी है?

नहीं, यह बदलाव स्थायी नहीं होता। जैसे ही अंतरिक्ष यात्री धरती पर वापस लौटते हैं, पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल फिर से उनके शरीर पर काम करने लगता है। कुछ ही हफ्तों या महीनों के भीतर, रीढ़ की हड्डी वापस अपनी सामान्य स्थिति में आ जाती है और उनकी लंबाई फिर से पहले जितनी ही हो जाती है।

4. स्वास्थ्य पर प्रभाव और चुनौतियां

लंबाई बढ़ना सुनने में अच्छा लग सकता है, लेकिन यह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए कुछ स्वास्थ्य चुनौतियां भी पैदा करता है:

  • पीठ दर्द: रीढ़ के अचानक विस्तार से मांसपेशियों में खिंचाव और पीठ दर्द की समस्या हो सकती है।

  • हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी: गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम होने लगता है, जिसे रोकने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में रोजाना व्यायाम करना पड़ता है।

  • स्पेस सूट की फिटिंग: नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां स्पेस सूट और यान की सीटों को इस तरह डिजाइन करती हैं कि लंबाई बढ़ने के बावजूद वे फिट बैठ सकें।